व्यंग्य : भाई की सियासत, पहले लात मारो फिर राखी बंधवालो

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पहले लात मारो फिर प्यार के नाटक से पुचकारो | यह एक बड़ा पुराना और असरदार सियासी दांव है| इसे बड़े-बड़े नेता नहीं समझ पाते तो आम जनता क्या समझेगी | गुजरात के नरोदा में पानी की समस्या लेकर विधायक की शरण में गई महिला को लात-घूंसों से आम जनता होने का एहसास दिलाया गया | कभी पैर पकड़कर वोट मांगने वाले भाजपा विधायक बलराम थवानी (BJP MLA Balram Thawani) ने पहले तो महिला को लात मारी फिर वीडियो वायरल हुआ तो माफी मांगते हुए राखी बंधवाने के लिए हाथ बढ़ाया |

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उन्होंने कहा मैं पिछले 22 सालों से राजनीति में हूं, ऐसा पहले कभी नहीं हुआ| वह मेरी बहन है, लेकिन यहाँ बहन यह नहीं समझ पाई की भाई 22 सालों से राजनीति में है और जानता है कि इस लात के बाद हाथ बढ़ाने का फायदा बहन को भले न हो भाई को होगा |

पुलिस को जवाब देने से बचने का , मामले को तूल पकड़ने के पहले सँभालने का और पार्टी आलाकमान के सामने पेश होने से बचने का सीधा फार्मूला अपनाया विधायक ने| क्योंकि 22 साल के अनुभव से इतना तो कोई भी सीख ही सकता है| सुबह बहन पर लात बरसाने वाले भाई के मन में शाम को अचानक इतना प्यार कहा से आया इसका गणित और केमेस्ट्री समझना इतना पेंचीदा नहीं है| यही सियासत है और यही जनता के भोलेपन का फायदा उठाने की कला |

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सवाल यह भी है कि अगर महिला थाने नहीं जाती, वीडियो वायरल नहीं होता तो क्या भाई का यह प्रेम अपराधबोध बन कर गुजरात के गलियारों में बहता ? ताज्जुब यह है कि महिलाओं के हितो की रक्षा का ढिंढोरा पीटने वाली सरकार ने विधायक (BJP MLA Balram Thawani) को तलब तक नहीं किया | राज्य और केंद्र दोनों में बीजेपी का शासन है| क्या यह माफ़ी सचमुच अपराधबोध है? यहाँ जनता की जागरूकता और नेताओं से पंगा न लेने की मंशा एक बार फिर भारी पड़ी है और महिला ने खुद के अपमान का घूंट पी कर राखी बांधी है | बहरहाल अच्छे दिन में ऐसे विधायक है तो कुछ भी मुमकिन है ………….

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