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Karwa Chauth Katha In Hindi : करवा चौथ पर हास्य व्यंग कहानी

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वैसे तो पति नाम के निरीह प्राणी को पूरे साल दम मारने की फ़ुरसत नहीं मिलती है पर एक दिन ऐसा आता है जब उसे सूली पर लटकाने का विधिवत कार्यक्रम होता है (Karwa Chauth Katha In Hindi). श्रीमतीजी पूरे साल और कामों में इतना व्यस्त रहती हैं कि पतिदेव की ख़ातिरदारी में कोई न कोई कोताही ज़रूर रह जाती है.इसीलिए किसी शुभचिंतक ने करवा-चौथ का मुहूरत सोच-विचारकर निकाला है.

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पति को तीन सौ पैसठ दिन भकोसने वाली बीवी जब अचानक किसी दिन मेहरबान हो जाय तो समझो कि शामत या क़यामत ज्यादा दूर नहीं है.शायद इसी तरह के प्रसंगों से प्रेरित होकर तुलसी बाबा ने लिखा है,’नवनि नीच कै अति दुखदाई,जिमि अंकुस,धनु,उरग,बिलाई’! यहाँ भी जब पत्नी से अनायास ज़्यादा प्यार टपकने लगता है तो पति की  हालत पतली होने लगती है.उसे लगता है कि वह बलि का बकरा है और उसको आज के ही दिन हलाल करने के लिए तैयार किया गया है.

क़रीब पंद्रह दिन पहले से इस दिन की आहट सुनाई  देने लगती है.जेब की तलाशी तो पूरे साल ली जाती है लेकिन इन दिनों तो बक़ायदा डकैती पड़ती है (Karwa Chauth Katha In Hindi). मजाल है कि इस पवित्र पर्व के अनुष्ठान के लिए पति उफ़ भी कर दे.साल भर पानी पी-पी कर कोसने वाली सबला जब धर्मपत्नी बनने को आतुर हो उठती है तो फिर से तुलसी बाबा डराते हैं,”का न करै अबला प्रबल,केहि जगु काल न खाय” !पति की पूजा  के नाम पर पत्नी कितनी मेवा खा लेती है यह विशेषज्ञ पति ही बता सकता है. प्यारा और दुलारा पति अडोस-पड़ोस से गुजरता हुआ नकली मुस्कान चेहरे पे लादे रहता है और सोचता है कि कितनी जल्दी चाँद दिखे और उसका जो भी होना है हो जाये !चाँद को छन्नी से देखने का फंडा भी अजीब है.विवाह से पहले जिस चाँद से उसकी तुलना की जाती है ,पत्नी देखती है कि उसमें क्या ख़ास है जो अब उसमें नहीं रहा !

पत्नी के मेहंदी भरे हाथ पति को कैक्टस की चुभन से कम नहीं लगते.वह इस ख़ास  दिन को लेकर इतना आशंकित रहता है कि उसे भी कुछ दिन पहले से अपनी व्यूह-रचना करनी पड़ती है.इस समय अगर पति की  जेब टटोली जाये तो पैसों की जगह बादाम,किशमिश और काजू के कुछ दाने ज़रूर मिल जायेंगे.जहाँ उसकी पत्नी अपने त्यौहार की तैयारी सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित करती है वहीँ पति ज़्यादातर चुपचाप ही रहता है.किसी भावी आशंका को वह अपने दोस्तों तक से ज़ाहिर तक नहीं कर सकता !क्या पता,संयोग से मिला एक सुकून भरा दिन भी उससे रूठ जाए !

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सभी पतियों की तरह हम भी उम्मीद करते हैं कि यह करवा-चौथ भी पिछले की तरह बिना किसी ज्वालामुखी के फटे ,निर्विघ्न संपन्न हो जाये .पत्नी की मेहँदी का रंग नकली न निकले और यह अनुष्ठान बिना ए.टी.एम.

को नुकसान पहुँचाये,अगले साल तक के लिए विराम ले ले !जैसे हमसे पहले वालों के दिन बहुरे,वैसे हमारे भी बहुरें,इसी कामना के साथ करवा-चौथ की बधाई।

(संतोष त्रिवेदी द्वारा लिखित हास्य व्यंग ‘करवा-चौथ और बेचारा पति’)

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-Mradul tripathi

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