मशहूर फिल्म अभिनेता और नाटककार Girish Karnad का निधन

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सूरज हूँ ज़िंदगी की रमक़ छोड़ जाऊँगा, 
मैं डूब भी गया तो शफ़क़ छोड़ जाऊँगा  
इकबाल साजिद की ये पंक्तियाँ गिरीश कर्नाड के लिए एकदम सार्थक लगती हैं|
लेखक, अभिनेता, फिल्म निर्देशक, नाटककार, रंगकर्मी, दर्शनशास्त्र, राजनीतिशास्त्र तथा अर्थशास्त्र के ज्ञाता, प्रोफ़ेसर, हिंदी, अंग्रेज़ी और कन्नड़ भाषाओँ के जानकार, कई लब्ध प्रतिष्ठित पुरस्कारों से सम्मानित गिरीश कर्नाड ( Girish Karnad) की बहुमुखी प्रतिभा की जितनी भी तारीफ की जाए, उनके लिए जितने भी विशेषणों का प्रयोग किया जाए वह कम है| ऐसी प्रतिभा सम्पन्न शख्सियत सोमवार को अपने प्रशंसकों को अलविदा कह गई| उनका सोमवार को 81 साल की उम्र में निधन हो गया| उनके निधन की वजह मल्टीपल ऑर्गेन का फेल होना है|

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गिरीश कर्नाड (Girish Karnad) का जन्म 19 मई 1938 को महाराष्ट्र के माथेरान में हुआ था| उन्हें भारत के जाने-माने समकालीन लेखक, अभिनेता, फिल्म निर्देशक और नाटककार के तौर पर भी जाना जाता था|  उन्होंने अपना पहला नाटक कन्नड़ में लिखा जिसे बाद में अंग्रेज़ी में भी अनुवाद किया गया| साथ ही उनके नाटकों में ‘ययाति’, ‘तुग़लक’, ‘हयवदन’, ‘अंजु मल्लिगे’, ‘अग्निमतु माले’, ‘नागमंडल’ और ‘अग्नि और बरखा’ काफी प्रसिद्ध रहे हैं| गिरीश कर्नाड (Girish Karnad ) ने  इब्राहीम अलकाजी, प्रसन्ना, अरविन्द गौड़ और बीवी कारंत के नाटकों का अलग-अलग तरीके से प्रभावी व यादगार निर्देशन किया था|

गिरीश कर्नाड (Girish Karnad) की हिंदी के साथ-साथ कन्नड़ और अंग्रेजी भाषा पर भी अच्छी खासी पकड़ थी|

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गिरीश कर्नाड (Girish Karnad )  के निधन से बॉलीवुड में भी शोक का माहौल है| गिरीश कर्नाड  हिंदी सिनेमा जगत के भी मशहूर अभिनेता रहे हैं| इक़बाल, निशांत, आशा, उत्सव, स्वामी, डोर, सूत्रधार, हे राम !, आनंद भैरवी, भूमिका जैसी कई फिल्मों उन्होंने अपने अभिनय का लोहा मनवाया है| उन्होंने सलमान खान (Salman Khan)  की फिल्म ‘एक था टाइगर’ और ‘टाइगर ज़िंदा है’ में भी अभिनय किया था|

एक कोंकणी भाषी परिवार में जन्मे कर्नाड ने 1958 में धारवाड़ स्थित कर्नाटक विश्वविद्यालय से स्नातक उपाधि ली थी| इसके पश्चात वे एक रोड्स स्कॉलर के रूप में इंग्लैंड चले गए जहां उन्होंने ऑक्सफोर्ड के लिंकॉन तथा मॅगडेलन महाविद्यालयों से दर्शनशास्त्र, राजनीतिशास्त्र तथा अर्थशास्त्र में स्नातकोत्तर की उपाधि प्राप्त की थी| वे शिकागो विश्वविद्यालय के फुलब्राइट महाविद्यालय में विज़िटिंग प्रोफेसर भी रह चुके हैं|

गिरीश कर्नाड (Girish Karnad) की प्रसिद्धि एक नाटककार के रूप में ज्यादा है| गिरीश कर्नाड ने वंशवृक्ष नामक कन्नड़ फिल्म से निर्देशन की दुनिया में कदम रखा था| इसके बाद इन्होंने कई कन्नड़ तथा हिन्दी फिल्मों का निर्देशन तथा अभिनय भी किया|

गिरीश कर्नाड को 1994 में साहित्य अकादमी पुरस्कार, 1998 में ज्ञानपीठ पुरस्कार, 1974 में पद्म श्री, 1992 में पद्म भूषण, 1972 में संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार, 1992 में कन्नड़ साहित्य अकादमी पुरस्कार, 1998 में ज्ञानपीठ पुरस्कार और 1998 में उन्हें कालिदास सम्मान से सम्‍मानित किया गया है|

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गिरीश कर्नाड के निधन पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दुख जताया और ट्वीट कर श्रद्धांजलि दी| प्रधानमंत्री ने कहा कि गिरीश कर्नाड अलग अलग तरह के रोल के लिए हमेशा याद किए जाते रहेंगे| उनके कार्य आने वाले समय में भी उतने ही लोकप्रिय रहेंगे|

कांग्रेस के मीडिया प्रभारी रणदीप सिंह सुरजेवाला ने अपने ट्वीट में लिखा कि गिरीश कर्नाड का निधन क्रिएटिविटी की दुनिया में अपूरणीय क्षति है जिसे कभी भरा नहीं जा सकता| केंद्रीय मंत्री सदानंद गौड़ा ने कन्नड़ में ट्वीट किया और मशूहर लेखक, एक्टर और निदेशक को श्रद्धांजलि दी|

गिरीश कर्नाड के निधन पर राष्ट्रपति ने भी दुख जताया और कहा कि उनके निधन से हमारी सांस्कृतिक दुनिया निर्धन हो गई| राष्ट्रपति ने कर्नाड के परिजनों से सांत्वना जाहिर की|

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