कविता : प्रेत आएगा

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किताब से निकाल ले जाएगा प्रेम-पत्र

गिद्ध उसे पहाड़ पर नोच-नोच खाएगा

चोर आएगा तो प्रेम-पत्र ही चुराएगा

जुआरी प्रेम-पत्र ही दांव लगाएगा

ऋषि आएंगे तो दान में मांगेंगे प्रेम-पत्र

बारिश आएगी तो प्रेम-पत्र ही गलाएगी

आग आएगी तो जलाएगी प्रेम-पत्र

बंदिशें प्रेम-पत्र ही लगाई जाएंगी

सांप आएगा तो डंसेगा प्रेम-पत्र

झींगुर आएंगे तो चाटेंगे प्रेम-पत्र

कीड़े प्रेम-पत्र ही काटेंगे

प्रलय के दिनों में सप्तर्षि मछली और मनु

सब वेद बचाएंगेग

कोई नहीं बचाएगा प्रेम-पत्र

कोई रोम बचाएगा, कोई मदीना

कोई चांदी बचाएगा कोई सोना

मैं निपट अकेला कैसे बचाऊंगा तुम्हारा प्रेम-पत्र

 

-बद्रीनारायण

स्वागतम 2019…

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