महिलाएं क्यों सेक्स की जगह तलाश रही हैं आउटरकोर्स

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हर शादी-शुदा व्यक्ति चाहता है कि उसकी सेक्स लाइफ बेहतर हो और वह अपने पार्टनर को खुश रख सके। इसके लिए कई बार मेल पार्टनर कई तरह के एक्सपेरिमेंट सेक्स के दौरान करते हैं। हालांकि अपनी सेक्स लाइफ को बेहतर बनाने और उसमे नया रोमांच पैदा करने के लिए यह जरूरी भी है। लेकिन कई बार कई तरह के उपाय और टिप्स अपनाने के बाद भी जब समस्या का समाधान नहीं हो पाता तो इसके लिए एक्सपर्ट्स की सलाह लेना बेहद आवश्यक हो जाता है। क्योंकि एक एक्सपर्ट ही इसके बारे जरूरी और उचित सलाह दे सकता है। हालांकि इन दिनों महिलाएं ऑर्गेज्म हासिल करने के लिए इंटरकोर्स यानी सेक्स की जगह आउटरकोर्स का सहारा ले रही हैं। यह बात एक स्टडी में सामने आई है।

अब इस बात को जानकार आपने मन में भी यह सवाल तो जरूर उठ ही रहा होगा कि आखिर आउटरकोर्स है क्या? तो आपको बता दें कि जब महिलाओं को इंटरकोर्स यानी सेक्स से ऑर्गेज्म हासिल नहीं होता तो वे किसी और चीज़ का सहारा लेती हैं। इस किसी और चीज़ को ही आउटरकोर्स कहा जाता है। जैसे आजकल बाजार में कई तरह के सेक्स टॉय उपलब्ध हैं। इस सेक्स टॉय की मदद से भी महिलाएं ऑर्गेज्म हासिल करती हैं। इसलिए इन सेक्स टॉय को भी आउटरकोर्स कहा जा सकता है।

हाल ही में इंडियाना यूनिवर्सिटी के सेंटर फॉर सेक्शुअल हेल्थ प्रमोशन में एक शोध किया गया। इस शोध के जो निष्कर्ष सामने आए वे बेहद ही चौकाने वाले थे। इस शोध में शामिल अधिकतर महिलाओं का कहना था कि उन्हें आउटरकोर्स के बारे में नहीं पता था लेकिन उन्हें सिर्फ इंटरकोर्स से ऑर्गैज्म हासिल करना आसान नहीं था। इस शोध में शामिल 18.4 प्रतिशत महिलाओं ने बताया कि उन्हें ऑर्गेज्म हासिल करने के लिए इंटरकोर्स के अलावा कुछ और की जरूरत थी।

गौरतलब है कि इस शोध में तकरीबन 1 हजार 55 महिलाओं जिनकी उम्र 18 से 94 साल के बीच थी को शामिल किया गया था। शोधकर्ताओं ने कहा कि आउटरकोर्स का मतलब है नॉन-पेनिट्रेटिव सेक्शुअल ऐक्टिविटी। इसे फोरप्ले भी कहा जा सकता है क्योंकि कई महिलाओं को सेक्स से ज्यादा फोरप्ले से ओर्गेस्म हासिल होता है। ज्यादातर महिलाएं क्लिटरल स्टीमुलेशन या वाइब्रेटर का इस्तेमाल कर ओर्गेस्म हासिल करती हैं।

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