प्राचीन गर्भनिरोधक तरीके जानकर चौंक जाएंगे आप

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परिवार नियोजन जिसे आज सभी लोग जानते हैं। क्या आपको पता है कि देश में परिवान नियोजन कब शुरू किया गया था? तो आपको बता दें कि साल 1952 में इस कार्यक्रम की शुरुआत की गई थी। हालांकि साल 1977 में इस कार्यक्रम में भारत सकरार द्वारा कुछ बदलाव किया और नई बर्थ कंट्रोल (Five Natural Solutions For Birth Control In Hindi) पॉलिसी को लागू किया। इस कार्यक्रम की आपातकाल के दौरान जमकर आलोचना की गई। इस आलोचना के बाद इस कार्यक्रम का नाम बदल दिया गया। अब इसे परिवार कल्याण कार्यक्रम के नाम से जाना जाता है।

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आज के दौर में कई लोग अपने परिवार को नियोजित रखने के लिए कई वैज्ञानिक तरीके अपनाते है और दवाओं का सेवन करते हैं। लेकिन क्या आपको पता है कि प्राचीन काल में भी परिवार नियोजन को अपनाया जाता था। उस समय गर्भ निरोध के लिए कुछ ऐसे तरीके अपनाए जाते थे जिसे जानकार आप हैरान हो जाएंगे।

तो चलिए जानते हैं कि प्राचीन काल में किन तरीकों का इस्तेमाल किया जाता था (Five Natural Solutions For Birth Control In Hindi) :

#1

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प्राचीन समय में गर्भ निरोध के लिए दुनियाभर की कई संस्कृतियों में नींबू का इस्तेमाल किया जाता था। आधे नींबू को शुक्राणुनाशक के रूप में कई संस्कृतियां इस्तेमाल करती थी। आपको यह बात जानकार हैरानी होगी कि पहले के समय में कंडोम के रूप में भेड़ के मूत्राशय में निचोड़े हुए आधे नींबू का इस्तेमाल किया जाता था।

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#2

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वहीं प्राचीन मिस्र की महिलाएं गर्भ निरोध के लिए मगरमच्छ के मल का प्रयोग करती थीं। वे पेसरिज़ के रूप में इसका इस्तेमाल करती थीं। आपको बता कि आधुनिक शुक्राणुनाशक की तरह मगरमच्छ का मल हल्का क्षारीय होता है। यही कारण है कि इसका इस्तेमाल कारगर रहता था।

#3

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इसके अलावा प्राचीन काल में गर्भ निरोध के लिए कई जानवरों की अंतड़ियों को कंडोम की तरह इस्तेमाल किया जाता था। इस तरह के कंडोम के दो फायदे होते थे। यह गर्भ निरोध करने के साथ ही संक्रमण से भी बचाव करता था।

#4

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प्राचीन काल में ऐसी मान्यता थी कि चांद की तरफ मुंह करके सोने से महिलाएं गर्भवती हो जाती है। इसी वजह से गर्भ निरोध के लिए महिलाएं चांद की तरफ अपनी पीठ करके सोती थीं। यह परम्परा ग्रीनलैंड में प्रचलित थी।

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#5

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ग्रीनलैंड की तरह ग्रीस में भी एक मान्यता थी। ग्रीस की महिलाओं का मानना था कि जैतून और देवदार के तेल को मिलकर नहाने से गर्भ निरोध होता है। उनका मानना था कि इस स्नान के बाद पुरुषों का स्पर्म उनक शरीर से निकल जाता है।

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