क्या है मेनोपॉज और महिलाओं में इसके बाद क्यों आता है बदलाव

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दुनिया में हर लड़की को मासिक धर्म एक उम्र के बाद शुरू हो जाता है। मासिक धर्म को ही पीरियड्स कहते हैं। मासिक धर्म के दौरान लड़कियां कोई भी धार्मिक कार्य नहीं कर पाती। वहीं तेजी से बदलते इस दौर में लोगों की जीवनशैली पूरी तरह से बदल चुकी है। इस बदली हुई लाइफस्टाइल की वजह से अब कई नई बीमारियां भी जन्म ले चुकी हैं। इतना ही नहीं लाइफस्टाइल बदलने के कारण अब जो समस्याएं बुजुर्गों को होती थीं वे अब युवाओं को भी होने लगी हैं। जैसे कम उम्र में ही बालों का सफ़ेद होना, दिल का दौरा पड़ना, घुटनों या जोड़ों में दर्द की समस्या और मेनोपॉज यानी रजोनिवृत्ति।

वैसे तो मेनोपॉज यानी रजोनिवृत्ति महिलाओं को 50 वर्ष की आयु के बाद होती है लेकिन आज के दौर में यह बेहद कम उम्र में होने लगी है। मेनोपॉज यानी रजोनिवृत्ति वह अवस्था होती है जब महिलाओं का मासिक धर्म स्थायी रूप से बंद हो जाता है। इस अवस्था में आने पर यानी कि मासिक धर्म के बंद होने पर महिलाओं के शरीर में कई तरह के हॉर्मोंस में बदलाव होने लगता है। इसी वजह से महिलाओं को हड्डियां भी कमजोर होने लगती हैं। जब महिलाएं को मेनोपॉज होता है तो ऐसे में उन्हें ऑस्टियोपरॉसिस का खतरा भी बढ़ जाता है। इससे दिल का दौरा या फिर मस्तिष्क पर बुरा असर पड़ने की भी संभावना रहती है। इस समस्या से बचने के लिए आपको अपने मोटापे पर नियंत्रण रखना चाहिए।

मेनपॉज से न सिर्फ महिलाओं के हार्मोन्स में परिवर्तन आता है बल्कि उनमें मानसिक बदलाव भी होते हैं। जैंसे महिलाएं इस अवस्था में आने पर छोटी-छोटी बातों में चिड़चिड़ाना, गुस्सा करना और इमोशनल होने लगती हैं। कई महिलाएं इसे बीमारी समझ लेती हैं और फिर डॉक्टर्स के चक्कर काटती हैं। लेकिन यह कोई बीमारी नहीं है और कुछ समय बाद यह समस्या स्वतः ही ठीक हो जाती है।

मेनपॉज के लक्षण

बार-बार पेशाब जाना

नींद न आना

चिड़चिड़ापन, डिप्रेशन

बाल झड़ना

शरीर में जलन, थकावट और चेहरे पर झुर्रियां

दिल की धड़कन बढ़ना

इसे बचने के लिए आप अपने मोटापे पर नियंत्रण रखें। उचित खान-पान नियमित व्यायाम इस समस्या से निजात दिलाता है।

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