इंसानो का ही नहीं अल्कोहल से बंदरों का भी है पुराना रिश्ता

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वैज्ञानिकों ने माना है कि अल्कोहल को मेटाबोलाइज (Metabolize) करने की क्षमता के विकास ने मानवता के प्रागैतिहासिक बंदरों (Monkey And Apes) के पूर्वजों को विलुप्त होने से बचाया है. मनुष्यों के पूर्वज और दूसरे बंदर, जो 10 मिलियन वर्ष पहले जीवित थे, एक प्रोटीन ले जाने के लिए विकसित हुए, जो उस प्रक्रिया को और अधिक कुशल बनाता है. इन सभी ने न केवल हमें बल्कि गोरिल्ला, चिम्प्स (chimps) और बोनोबोस को भी जन्म दिया, जो अल्कोहल में मौजूद रासायनिक यौगिक इथेनॉल (ethanol) को तोड़ सकते हैं.

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Monkey And Apes

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चिंपांजी के साथ मनुष्य के पूर्वज 6 से 8 मिलियन साल पहले रहते थे. लगभग 25 मिलियन साल पहले Monkey And Apes ने एक सामान्य पूर्वज साझा किया था. ‘अल्कोहल एंड ह्यूमन: ए लॉन्ग एंड सोशल अफेयर’ (Alcohol and Human: A Long and Social Affair) नामक एक नई किताब में, प्रोफेसर किम होकिंग्स और रॉबिन डनबर ने लिखा है कि इस क्षमता ने प्रतिद्वंदी बंदर प्रजातियों के खिलाफ अस्तित्व की लड़ाई में उनकी मदद की है. इसने उन्हें जमीन पर गिरे पके हुए फल और खराब हो चुके फलों को खाने दिया, जो कि प्रतिद्वंदी आबादी नहीं कर सकती थी.

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Monkey And Apes

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आपको बता दें कि बंदर (Monkey And Apes) अभी भी फलों में अधिक मात्रा में इथेनॉल बर्दाश्त नहीं कर सकते हैं और वहीं लेखक कहते हैं कि कैलोरी का यह नया स्रोत विलुप्त होने के कगार से बंदरों को वापस ला सकता है. होकिंग्स का कहना है कि उन्होंने आज भी देखा है कि apes पके हुए फल और मनुष्य द्वारा उत्पादित palm wine का सेवन कर सकते हैं. उन्होंने कहा कि यह सुनिश्चित करना कठिन है कि वह ऐसा क्यों करते हैं और यह शराब के साथ हमारे अपने संबंधों के जटिल इतिहास को दर्शाता है. एक दिलचस्प बात यह है कि पेड़ से पक कर गिरे हुए फलों में अल्कोहल का स्तर आम तौर पर लगभग 1 से 4 फीसदी के बीच होता है. वहीं मनुष्यों द्वारा पी जाने वाली शराब की मात्रा इससे कहीं अधिक मजबूत है.

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-Mradul tripathi

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