ग़ालिब की शायरी से करें लड़की को इम्प्रेस

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उर्दू के लोकप्रिय शायर मिर्ज़ा ग़ालिब का आज जन्मदिन (Mirza Ghalib Birthday 2018 ) है। मिर्ज़ा ग़ालिब की लेखनी में अलग ही कशिश है। आज के वक्त में ऐसा लेखन देखने को नहीं मिलता। शब्दों के अमर हो जाने का सच्चा उदाहरण हैं मिर्ज़ा गालिब। इश्क, नफ़रत या दुश्मनों से प्यार सभी उनकी लेखनी में झलकता है। मिर्ज़ा ग़ालिब की शायरी में न कोई छल कपट न कोई फूहड़ता थी। आज के वक्त भी उनकी लेखनी दिलों को छू जाती है।

इश्क को यदि समझना है तो मिर्ज़ा ग़ालिब की शायरी (Mirza Ghalib Birthday 2018 ) से बेहतरीन कुछ भी नहीं है। हम आपको बता रहे हैं मिर्ज़ा ग़ालिब की शानदार लेखनी, जो सही मायने में मोहब्बत क्या है, यह सिखाती है।

– उनके देखे से जो आ जाती है मुंह पर रौनक़

 वो समझते हैं कि बीमार का हाल अच्छा है

– रोज़ ये दिल बेकरार होता है,
काश के तुम समझ सकते की
चुप रहने वालो को भी किसी से प्यार होता है

– दुःख देकर सवाल करते हो,
तुम भी जानम कमाल करते हो

– देख कर पूछ लिया हाल मेरा,
चलो कुछ तो ख्याल करते हो

– हम तो फना हो गए उनकी आँखे देखकर,
ग़ालिब ना जाने वो आइना कैसे देखते होंगे

– इश्क का होना भी लाजमी है शायरी के लिये..
कलम लिखती तो दफ्तर का बाबू भी ग़ालिब होता

– तुम मुझे कभी दिल, कभी आँखों से पुकारो ग़ालिब,

ये होठो का तकलुफ्फ़ तो ज़माने के लिए है

– उसने मिलने की अजीब शर्त रखी
गालिब चल के आओ सूखे पत्तों पे लेकिन कोई आहट न हो

– इश्क़ पर ज़ोर नहीं है ये वो आतिश ‘ग़ालिब’

 कि लगाए न लगे और बुझाए न बुझे

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