एक कला है ‘न’ कहना

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जिस तरह बैंक वाले हर किसी को लोन के लिए हां नहीं कर सकते, कोच हर खिलाड़ी को कोचिंग देने के लिए नहीं मान सकते, उसी तरह आप भी अपने प्रोफेशन में हर किसी काम के लिए हां करने के लिए बाध्य नहीं हैं। कई बार ऐसी स्थितियां पैदा हो जाती हैं, जब हम अपनी प्राथमिकताएं कुछ अलग होने के बावजूद सामने वाले व्यक्ति को सिर्फ इसलिए मना नहीं कर पाते हैं कि उसके साथ हमारे संबंध न खराब हो जाएं। यह सही नहीं है। इससे आपका ही नुकसान होता है। हम आपको न कहने की कला के कुछ गुर सिखा रहे हैं ताकि आप बिना किसी खराब भावना के अच्छे शब्दों में सामने वाले को ‘न’ कहने की हिम्मत जुटा सकें।

जताएं थोड़ा सम्मान

जब आपसे कोई किसी काम में शामिल होने का अनुरोध करें और आप ऐसा नहीं चाहते तो उसे जताएं कि आप उसके प्रस्ताव का सम्मान करते हैं। इस स्थिति में आप कह सकते हैं कि यह सुनने में अच्छा लग रहा है, लेकिन बेहद व्यस्तता की वजह से मैं इसमें भाग नहीं ले पाउंगा। इस तरह आप उस काम को करने से भी बच जाएंगे और सामने वाले को खराब भी नहीं लगेगा।

उन्हें दिखाएं फायदा

बहुत बार नहीं सुनकर लोग इसलिए नाराज़ हो जाते हैं क्योंकि उन्हें लगता है कि आप सिर्फ अपने ही बारे में सोचते हैं। इससे बचने के लिए न कहते समय उन्हें दोनों का फायदा दिखाएं। जैसे आप कह सकते हैं, आयोजन से पहले भी मैं काफी व्यस्त हूं। यदि मैं आता भी हूं तो मैं कई जरूरी मीटिंग्स छूटेगी और मैं सही ढंग से शिरकत भी नहीं कर पाऊंगा। आप किसी ऐसे व्यक्ति को बुलाएं, जो इससे लाभान्वित हों।

लें किसी और की मदद

हर बार नहीं कहने का बोझ आपको ही उठाने की जरूरत नहीं है। इसके लिए आप स्मार्टली किसी दूसरे की मदद ले सकते हैं। जैसे यदि बॉस ने पहले ही कई काम दिए हैं और फिर एक बड़ा प्रोजेक्ट दे रहे हों तो कहें – सर, आपने मुझे पहले ये प्रोजेक्ट दिए हैं। अब यदि मैं नया प्रोजेक्ट लेता हूं तो किसी दूसरे प्रोजेक्ट को छोड़ना पड़ेगा।

जरूरी नहीं सब कुछ

कई बार हम अपने आपको इतनी सारी जगहों पर फंसा लेते हैं कि एक समय हमें समझ ही नहीं आता हैं कि क्या जरूरी है और क्या नहीं। अपनी गैरजरूरी व्यस्तताओं को ना कहना सीखें। जैसे किसी क्लब के प्रोग्राम को आयोजित करने से बचने के लिए कहें, मैं खुद आयोजन नहीं कर पाऊंगा| हां, सलाह जरूर दे सकता हूं। अपनी प्राथमिकता वाले कामों को ही हां कहना सीखें।

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