स्वामी विवेकानंद के वक्तव्य के उपलक्ष्य में युवा शिविर

0

इंदौर के रामकृष्ण मिशन आश्रम में शिकागो धर्मसभा में स्वामी विवेकानंद के वक्तव्य की 125वीं वर्षगांठ ( 125th Anniversary Of Swami Vivekananda’s Statement In Chicago ) के उपलक्ष्य में एक दिवसीय युवा शिविर का आयोजन किया। शिविर में इन्दौर संभाग के 900 महाविद्यालयीन छात्रों ने भाग लिया। शिविर में उपस्थित युवाओं ने प्रतिदिन सोने के पूर्व व्हाट्सएप छोड़ स्वामी विवेकानंद के साहित्य को पढ़ने का भी संकल्प लिया। स्वामी विवेकानंद के आदमकद चित्र के साथ युवाओं ने जमकर सेल्फी ली।

शिविर में मुख्य वक्ता अद्वैत आश्रम कोलकाता से आए स्वामी शुद्धिदानन्द ( 125th Anniversary Of Swami Vivekananda’s Statement In Chicago ), रायपुर यूनिवर्सिटी में UGC की स्वामी विवेकानंद चेयर के प्रोफ़ेसर डॉ.ओमप्रकाश वर्मा और नर्मदा क्षेत्र से समाजसेवी भारती ठाकुर ने युवाओं को ओजस्वी वाणी में स्वामी विवेकानंद के संदेश से अवगत करवाया। आभार रामकृष्ण मिशन इंदौर के सचिव स्वामी निर्विकारानंद ने किया।

डॉ.ओमप्रकाश वर्मा ने कहा कि वर्ष 1893 में स्वामी विवेकानंद शिकागो विश्व धर्म महासभा (125th Anniversary Of Swami Vivekananda’s Statement In Chicago) के लिए बिना निमंत्रण भारतवर्ष से गए थे। उस समय भारत पराधीन, गरीब और दुर्बल था, जिसे विदेशों में अनपढ़, गवांर और अपने ही बच्चों को नदी में मगरमच्छों के सामने फेंक देने वाली निष्ठुर जाति के रूप में चित्रित किया जाता था। उन्हें सभ्य बनाने के लिए भारत में धर्म प्रचारक भेजे जाते थे। विदेशों में भारत के प्रतिनिधि भी इस बात को स्वीकार कर भारत की छवि धूमिल कर रहे थे।

स्वामी शुद्धिदानन्द ने कहा कि शिकागो व्याख्यान (125th Anniversary Of Swami Vivekananda’s Statement In Chicago) स्वामी विवेकानंद के भारतवर्ष के लिए ज्वलंत प्रेम के जज्बात की अभिव्यक्ति हैं। स्वामीजी के शिकागो  वक्तव्य के अगले दिन प्रख्यात अमरीकी न्यूज़ पेपर ‘न्यूयॉर्क टाइम्स’ ने लिखा था, “स्वामी विवेकानंद को सुनकर यह स्पष्ट है कि भारत में धर्म प्रचारकों को भेजना हमारी मूर्खता थी, उल्टा हमें ही भारत से धर्म सीखना चाहिए”। स्वामी विवेकानंद ने सनातन हिन्दू धर्म की महत्ता को शिकागो में भव्य स्वरूप में रखकर नए विश्व बंधुत्व धर्म की स्थापना का कार्य किया था।

भारती ठाकुर ने स्वामीजी की प्रसिद्ध अंग्रेज शिष्या मार्गरेट नोबल के जीवन के बारे में बताया कि स्वामी विवेकानंद के देशसेवा के आव्हान पर अपने ठण्डे, अनुकूल, सुविधापूर्ण और आरामदायी जीवन  को छोड़कर गर्म, प्रतिकूल एवं सुविधाविहीन स्थितियों में भारत आकर आजीवन नैष्ठिक ब्रम्ह्चारिणी हो और पूर्ण भारतीय हो भगिनी निवेदिता नाम ग्रहण कर देशसेवा के कार्य में लग गई। वे भारत को अपना स्वदेश मानती थी और स्वाधीनता आंदोलन में प्रत्यक्ष अग्रणी हो क्रांतिकारियों के सहयोग में तत्पर रहीं।

शिविरार्थियों ने स्वामी विवेकानंद के ओजस्वी स्वदेश मंत्र का सामूहिक पाठ किया एवं ‘भारत माता की जय’ के उद्घोष के साथ वर्ष 2018 का सकारात्मक समापन किया।

मीडिया संवाद में बोले ‘कलम के सिपाही’

गश्त कर रहे जवानों पर कुत्तों का हमला

थप्पड़ के बदले कर दी हत्या

रहें हर खबर से अपडेट, ‘टैलेंटेड इंडिया’ के साथ| आपको यहां मिलेंगी सभी विषयों की खबरें, सबसे पहले| अपने मोबाइल पर खबरें पाने के लिए आज ही डाउनलोड करें Download Hindi News App और रहें अपडेट| ‘टैलेंटेड इंडिया’ की ख़बरों को फेसबुक पर पाने के लिए पेज लाइक करें – Talented India News

Share.