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रुकी धड़कनों ने दिलाई आजीवन कारावास से मुक्ति

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वॉशिंगटन – अमरीका (United States of America) के आयोवा (Iowa) से एक बेहद ही अजीब मामला सामने आया है। यहां के एक कैदी बेंजामिन श्रेइबर (Benjamin Schreiber) ने अदालत से एक बेहद विचित्र मांग की है। दरअसल मौत को छूकर या यूं कहें कि मौत की आगोश में जाने के बाद वापस आए बेंजामिन श्रेइबर (Benjamin Schreiber) ने अदालत में याचिका दायर करते हुए मांग की है कि उनकी आजीवन कारावास की सजा ख़त्म की जाए। अपनी याचिका में बेंजामिन श्रेइबर (Benjamin Schreiber) का कहना है कि जब में मर कर जिंदा हुए तो उनकी आजीवन कारावास की सजा भी पूरी हो गई। अपनी सजा पूरी होने का दावा करने वाले बेंजामिन ने कहा कि उनकी सजा को पूरा हुए 4 साल बीत चुके हैं। बेंजामिन ने अदालत में दायर अपनी याचिका में कहा कि साल 2015 में कुछ समय के लिए उनकी धड़कने रुक गई थीं और वे मर गए थे। लेकिन डॉक्टरों के प्रयास से उनकी धड़कने कुछ समय बाद फिर से चलने लगीं और उन्हें बचा लिया गया।

हालांकि अदालत की तीन सदस्यीय बेंच (Court of Law) ने बेंजामिन की याचिका को खारिज करते हुए कहा कि अभी वह जीवित है और इसलिए उसे जेल में ही रहना पड़ेगा। अदालत ने कहा कि उसे आजीवन कारावास की सजा दी गयी है। जब तक वह जीवित है तब तक उसे जेल में ही रहना होगा। वहीं अदालत ने कहा कि यदि वह मर गया है तो फिर इस याचिका का कोई मतलब ही नहीं बनता। मतलब यह याचिका ही झूठी है। गौरतलब है कि साल 1996 में बेंजामिन श्रेइबर (Benjamin Schreiber) ने एक शख्स की कुल्हाड़ी के हत्थे से हत्या कर दी थी। हत्या का आरोप सिद्ध हो जाने पर उसे आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई थी।

सजा के बाद से श्रेइबर (Benjamin Schreiber) कई बार अदालत के समक्ष याचिकाएं दायर कर चुके हैं। वहीं साल 2018 में श्रेइबर द्वारा वपैलो की एक अदालत में फिर से याचिका दायर की गई थी। इस याचिका में उसने कहा कि साल 2015 में जब बीमारी की वजह से उसकी मौत हो गई थी तब उसकी इच्छा के विरुद्ध डॉक्टरों ने उसे जीवित किया था। उसने बताया कि उसे किडनी स्टोन की वजह से सेप्टिक हो गया था। इसलिए उसे अस्पताल में दाखिल किया गया था। उसने बताया कि तेज बुखार के चलते वह बेहोश हो गया था। तब अस्पताल के स्टाफ ने उसके भाई से कहा कि उसे दर्द निवारक दवाएं दी जा रही हैं लेकिन उसका बच पाना मुमकिन नहीं है। हालांकि उसकी धड़कने रुक जाने के कुछ देर बाद डॉक्टर्स ने उसे उसकी और उसके भाई की इच्छा के विरुद्ध बचा लिया। श्रेइबर की इस याचिका को खारिज करते हुए जज (Judge) अमांडा पॉटरफील्ड  (Amanda Potterfield) ने कहा कि उसका तर्क बेबुनियाद है और उसकी मांग के लिए पर्याप्त नहीं है। जज ने श्रेइबर से कहा कि उसे बाकी बचे हुए दिन भी जेल में ही गुजारने पड़ेंगे।

Prabhat Jain

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