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पीएम मोदी के दोस्त ने किया भारत से दगा

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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प(Donald trump) और पीएम मोदी(Narendra modi) की दोस्ती के चर्चे कुछ दिन पहले काफी सुर्ख़ियों में थे। लेकिन हाल ही में अमेरिका की तरफ से कुछ ऐसा किया जा रहा है जिससे लगता है की ये दोस्ती महज दिखावा था। डोनाल्ड ट्रम्प अपने सख्त प्रशासन(Trump Administration) के लिए भी जाने जाते है। और ऐसा ही एक सख्त कदम उन्होंने ने भारत के के खिलाफ उठाया है जानकारी के अनुसार ट्रंप प्रशासन में एच-1बी (H1 B) आवेदनों को खारिज किए जाने की दर 2015 की तुलना में इस साल बहुत अधिक बढ़ी हैं. एक अमेरिकी थिंक टैंक की तरफ से किए गए अध्ययन में यह भी सामने आया है कि प्रसिद्ध भारतीय आईटी कंपनियों के एच-1बी आवेदन सबसे ज्यादा खारिज किए गए हैं. ये आंकड़ें उन आरोपों को एक तरह से बल देते हैं कि मौजूदा प्रशासन अनुचित तरीके से भारतीय कंपनियों को निशाना बना रहा है.

नेशनल फाउंडेशन फॉर अमेरिकन पॉलिसी की ओर से किए गए इस अध्ययन के अनुसार 2015 में जहां 6 प्रतिशत एच-1बी आवेदन खारिज किए जाते थे, वहीं वर्तमान वित्त वर्ष में यह दर बढ़कर 24 प्रतिशत हो गई है. जानकरी के अनुसार 2015 में अमेजन, माइक्रोसॉफ्ट, इंटेल और गूगल में शुरुआती नौकरी के लिए दायर एच-1बी आवेदनों में सिर्फ एक प्रतिशत को खारिज किया जाता था. वहीं 2019 में यह दर बढ़कर क्रमश: छह, आठ, सात और तीन प्रतिशत हो गई है. हालांकि एप्पल के लिए यह दर दो प्रतिशत ही बनी रही. वही टेक महिंद्रा के लिए यह दर चार प्रतिशत से बढ़कर 41 प्रतिशत हो गई, टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज के लिए छह प्रतिशत से बढ़कर 34 प्रतिशत, विप्रो के लिए सात से बढ़कर 53 प्रतिशत और इंफोसिस के लिए महज दो प्रतिशत से बढ़कर 45 प्रतिशत पर पहुंच गई.

प्राप्त आकड़ो के अनुसार शुरुआती रोजगार के लिए 2015 से 2019 के बीच अस्वीकार्यता दर छह प्रतिशत से बढ़कर 24 प्रतिशत हो गई, वहीं 2010 से 2015 के बीच यह कभी भी आठ प्रतिशत से अधिक नहीं थी। इसका साफ़ मतलब है की ट्रंप के प्रशासन में भारतीय आईटी कंपनियों को व्यवसाय करने के लिए अधिक मुश्किलों का सामना करना पद रहा। जब पीएम मोदी और ट्रंप के संबंधों को देखते हुए ऐसा होने का अनुमान नहीं था।

-Mradul tripathi

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