सऊदी अरब पहुंचा सकता है भारत को नुकसान

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सऊदी अरब भारत के आर्थिक नुकसान का कारण बन सकता है| अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की बढ़ती कीमत भारत के आर्थिक विकास की रफ्तार को सुस्त कर सकती है| अभी कच्चे तेल की कीमत 70 डॉलर प्रति बैरल है|

ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट के मुताबिक, कच्चे तेल की कीमतों के मौजूदा स्तर से नीचे आने की संभावना कम है क्योंकि सबसे बड़े तेल निर्यातक सऊदी अरब की नजर इसे और ज्यादा बढ़ाने पर है| भारत के लिहाज से तेल के दाम बढ़ने की यह खबर अच्छी नहीं है, खासकर तब जब सऊदी अरब दुनिया के सबसे तेजी से बढ़ते इस बाजार में 44 अरब डॉलर के रिफाइनरी प्रोजेक्ट में शामिल होने जा रहा है|

केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री ने एक इंटरव्यू में यह बात कही कि भारत चाहता है कि पेट्रोल की कीमत 50 डॉलर प्रति बैरल के आसपास रहे, लेकिन सऊदी अरब पेट्रोल की कीमत 80 डॉलर प्रति बैरल के आसपास चाहता है| मोदी सरकार तेल के सस्ते होने का भरपूर फायदा उठा चुकी है, लेकिन अब तेल की कीमतों में फिर से उछाल आना शुरू हो चुका है| यह ऐसे वक्त में हो रहा है, जब सरकार 2019 के चुनावों की तैयारी में है और देश में पेट्रोल के दाम हमेशा से ही एक चुनावी मुद्दा रहे हैं|

अपने कच्चे तेल की खपत सुनिश्चित करने के लिए ही सऊदी अरब भारत के रिफाइनरी प्रोजेक्ट में निवेश करने जा रहा है| दुनिया की सबसे बड़ी तेल उत्पादक कंपनी सऊदी अरामको महाराष्ट्र की 44 अरब डॉलर लागत वाली रिफाइनरी सह पेट्रो रसायन परियोजना में 50% हिस्सेदारी खरीदेगी। इसके लिए कंपनी ने बुधवार को एक समझौते पर हस्ताक्षर किए| 6 करोड़ टन क्षमता वाली इस रिफाइनरी से सऊदी अरामको को अपने 3 करोड़ टन कच्चे अतिरिक्त तेल का एक सुनिश्चित ग्राहक मिल जाएगा| नई दिल्ली में अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा मंच (IEF) के सम्मेलन से इतर इस संबंध में इस समझौते पर हस्ताक्षर किए गए|

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