राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के सम्मान में डाक टिकट जारी

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रामल्ला (वेस्ट बैंक): राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी(Mahatma Gandhi) का पूरा जीवन दुनिया भर के लिए एक आदर्श है। उन्होंने अपने सम्पूर्ण जीवन में सत्य अहिंसा के मार्ग का पालन किया था। और आज महात्मा गाँधी की 150 वी जयंती (Gandhi Jayanti 2019) है इस अवसर पर ‘गांधी की विरासत और मूल्यों’ सम्मान में फिलिस्तान(Palestine) ने एक डाक टिकट जारी किया है।
जानकारी के अनुसार फिलिस्तीन अथॉरिटी (PA) के दूरसंचार एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री इसहाक सेदेर के द्वारा यहां मंत्रालय में आयोजित एक समारोह में पीए में भारत के प्रतिनिधि सुनील कुमार की उपस्थिति में यह डाक टिकट जारी किया(Stamp To Honour Mahatma Gandhi)।

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इस कार्यक्रम में मंत्री इसहाक सेदेर ने कहा कि गांधी (Gandhi Jayanti 2019) की याद में यह डाक टिकट जारी किया गया है जिनकी विरासत और मूल्यों ने मानवता को राह दिखाने का काम किया है और आगे भी करते रहेंगे. वहीं सुनील कुमार ने कहा कि ‘राष्ट्रपिता’ को सम्मानित करने की यह पहल भारत और फिलिस्तीन के बीच मजबूत ऐतिहासिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक संबंध को दर्शाता है (Stamp To Honour Mahatma Gandhi)। 150 वी गाँधी जयंती के अवसर पर भारतीय मिशन ने फिलिस्तान के रामल्लाह में कई तरह के कार्यक्रम आयोजित किये।

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इस प्रकार के डाक टिकट गाँधी जी के सम्मान में पहले भी अंतर्राष्ट्रीय स्तर जारी किये जा चुके है. महात्मा गाँधी दुनिया के सर्वाधिक लोकप्रिय राजनेताओं और व्यक्तित्व में से हैं। इसलिए प्राय: अधिकतर देशों ने उनके सम्मान में डाक-टिकट जारी किये हैं। देश विदेश के टिकटों में देखें तो गांधी का पूरा जीवन चरित्र पाया जा सकता है। सामान्यतः डाक टिकट एक छोटा सा काग़ज़ का टुकड़ा दिखता है, पर इसका महत्त्व और कीमत दोनों ही इससे काफ़ी ज़्यादा है। डाक टिकट वास्तव में एक नन्हा राजदूत है, जो विभिन्न देशों का भ्रमण करता है एवम् उन्हें अपनी सभ्यता, संस्कृति और विरासत से अवगत कराता है। यह किसी भी राष्ट्र के लोगों, उनकी आस्था व दर्शन, ऐतिहासिकता, संस्कृति, विरासत एवं उनकी आकांक्षाओं व आशाओं का प्रतीक है। ऐसे में डाक-टिकटों पर स्थान पाना गौरव की बात है। यह जानकर कोई आश्चर्य नहीं होगा कि डाक टिकटों की दुनिया में गांधी सबसे ज़्यादा दिखने वाले भारतीय हैं तथा भारत में सर्वाधिक बार डाक-टिकटों पर स्थान पाने वालों में गाँधी जी प्रथम हैं। यहाँ तक कि आज़ाद भारत में वे प्रथम व्यक्ति थे, जिन पर डाक टिकट जारी हुआ।

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-Mradul tripathi

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