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पाकिस्तान के लिए गरीबी में गीला आटा

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“गरीबी में गीला आटा” यह कहावत इन दिनों पाकिस्तान के सन्दर्भ में पूरी तरह चरितार्थ हो रही है| पाकिस्तान सरकार ने इसके पूर्व आर्थिक तंगी से बचने के लिए अपने इस्तेमाल की 70 लक्ज़री कारें और पीएम हाउस की 102 कारें  नीलाम की थी, वहीं पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ के समय में पीएम हाउस में पाली गई आठ भैंसें भी बेची गई थीं । पहले से कंगाली की मार झेल रहे  पाकिस्तान को आर्थिक मोर्चे पर एक और बड़ा झटका लगा है| दरअसल, अब पाकिस्तान के करोड़ों डॉलर पानी में (No Oil And Gas Reserves Discovered In Karachi ) बह गए हैं|

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दरअसल, पाकिस्‍तान को कराची के समुद्र में हो रही तेल और गैस की खोज में जबरदस्‍त झटका (No Oil And Gas Reserves Discovered In Karachi ) लगा है। महीनों तक गहरे समुद्र में हुई खोज के बाद यहां पाकिस्‍तान को कुछ भी हाथ नहीं लगा। वहीं इस खुदाई में पाकिस्‍तान ने करीब 100 मिलियन डॉलर खपा दिए। अब इतना पैसा खर्च करने के बाद जब कुछ हाथ नहीं लगा तो इसे रूपया पानी में बहना ही कहेंगे न|

प्रधानमंत्री के स्‍पेशल असिस्टेंट नदीम बाबर ने बताया, “कराची के केकरा-1 में तेल और गैस की खोज को लेकर खुद प्रधानमंत्री इमरान खान बेहद आशान्वित थे कि उन्‍हें यहां पर कामयाबी हाथ लगेगी। उन्‍होंने खुद कहा था कि यदि इस खोज में सरकार सफल हो जाती है तो फिर पाकिस्‍तान को तेल के लिए किसी भी दूसरे देश के भरोसे नहीं रहना होगा और पाकिस्‍तान की ज़रूरत की पूर्ति कराची से ही हो जाएगी” नदीम बाबर ने कहा, “यहां पर पीएम के हाथ कुछ नहीं लगा है, अलबत्‍ता करोड़ों रुपए ज़रूर पानी में बह गए हैं।“

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उल्लेखनीय है कि कराची तट के पास केकरा -1 (Indus G-Block) में खुदाई का काम करीब 5500 मीटर की गहराई तक किया गया था। इस खुदाई में यूएस की ऑइल जेंट कंपनी एक्‍सोन मोबिल, इटली की ईएनआई के साथ कुछ दूसरी कंपनियां भी शामिल थीं। इन सभी के अलावा ऑइल एंड गैस डेवलपमेंट कंपनी लिमिटेड और पाकिस्‍तान पेट्रोलियम लिमिटेड इन कंपनियों को केकरा में खुदाई में दूसरी सहायता प्रदान कर रही थीं। इन सभी की इस प्रोजेक्‍ट में 25-25 फीसद की साझेदारी थी। बाबर की माने तो मकसद में नाकाम रहने के बाद यहां पर खुदाई का काम रोक दिया गया है। आपको यहां पर बता दें कि पाकिस्‍तान को अपनी ज़रूरत का करीब 85 फीसद तेल विदेशों से खरीदना पड़ता है।

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खुदाई के लिए कराची के समुद्र में 280 किमी के क्षेत्र को चुना गया था। इसी वर्ष 13 जनवरी को यहां पर खुदाई शुरू की गई थी। कुछ सर्वों में यह कहा गया था कि केकरा भारत के बॉम्‍बे हाई की तर्ज पर ही है। इसी वजह से यहां पर भारी मात्रा में तेल और प्राकृतिक गैस होने की उम्‍मीद भी जताई गई थी। जहां तक बॉम्‍बे हाई की बात है तो आपको बता दें कि यहां से करीब 350,000 बैरल प्रति दिन के हिसाब से कच्‍चा तेल निकाला जाता है। केकरा में निराशा हाथ लगने के बाद खुदाई से जुड़े अधिकारियों ने कहा है कि तेल और गैस का क्षेत्र हमेशा से हाई रिस्‍क और हाई रिवार्ड वाला रहा है। लिहाजा यहां पर फायदा और नुकसान कुछ भी हो सकता है। जहां तक बॉम्‍बे हाई की बात है तो भारत को यहां भी 40 कोशिशों के बाद सफलता हाथ मिली थी।

हालांकि पाकिस्‍तान के फेडरल मिनिस्‍टर फॉर मेरिटाइम अफेयर्स सैय्यद अली हैदर जैदी का कहना है कि पाकिस्‍तान ने यहां पर तेल और गैस की खोज के लिए 18 बार प्रयास किया था। इस दौरान अलग-अलग जगहों पर ड्रिलिंग की गई, लेकिन सफलता हाथ नहीं लगी। इसके बाद भी उन्‍होंने यहां पर तेल और गैस मिलने की उम्‍मीद नहीं छोड़ी है। उनका कहना है कि भारत को 43वीं बार में, लीबिया को 58वीं बार में और नॉर्वे को 78वीं बार की गई खुदाई के दौरान इस क्षेत्र में सफलता मिली थी। इस सफलता को पाने के लिए करीब एक दशक का समय भी लगा था। उनका यह भी कहना है कि सरकार इस खोज को बंद नहीं करेगी।

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