नेल्सन मंडेला :  नस्ल भेद के किले को किया ध्वस्त

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दुनिया के अनेक महापुरुषों को हमने विस्मृत कर दिया है, लेकिन कई महापुरुष ऐसे भी हैं, जिन्हें उनके जीवन में जितना सम्मान मिला, उससे कहीं ज्यादा उनकी मृत्यु के बाद उन्हें दुनिया ने सम्मान दिया, ऐसे ही नेल्सन मंडेला भी हैं| नेल्सन मंडेला आज भले ही हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन जब भी दुनिया में शांति की बात आती है तो उन्हें ज़रूर याद किया जाता है| आज यानी 18 जुलाई को नेल्सन मंडेला का 100वां जन्मदिन है| उनके जन्मदिन को संयुक्त राष्ट्रसंघ ‘नेल्सन मंडेला अंतरराष्ट्रीय दिवस’ के रूप में मनाता है|

पिछले कुछ वर्षों में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उनके सम्मान में लगातार वृद्धि हो रही है| उन्होंने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर रंगभेद, मानवाधिकारों की रक्षा, लैंगिक समानता की स्थापना और नस्ल भेद के खिलाफ आवाज उठाई| वे सम्पूर्ण दुनिया की मानव जाति को अपनी परिधि में लाने वाले राजनीतिक आन्दोलन के जननायक थे|

अफ्रीका के गांधी

नेल्सन मंडेला का जन्म दक्षिण अफ्रीका में बासा नदी के किनारे ट्रांसकी के मर्वेजो गांव में 18 जुलाई, 1918 को हुआ था। उन्हें लोग प्यार से मदीबा बुलाते थे, उन्हें अफ्रीका के गांधी के रूप में भी जाना जाता है| उन्हें गांधी इसलिए कहा जाता है क्योंकि वे महात्मा गांधी के विचारों से बहुत प्रभावित थे| बापू के विचारों से प्रभावित होकर ही उन्होंने रंगभेद के खिलाफ मुहिम छेड़ी थी|

उनके जीवित रहते संयुक्त राष्ट्र ने सम्मान में उनके जन्मदिन 18 जुलाई को ‘मंडेला दिवस’ के रूप में घोषित कर दिया और इसे अंतरराष्ट्रीय दिवस के रूप में मनाया था| उन्हें उनके जीवन में बहुत सम्मान मिला, जो मरने के बाद और बढ़ता गया| 2004 में जोहांसबर्ग में स्थित सैंडटन स्क्वायर शॉपिंग सेंटर में मंडेला की मूर्ति स्थापित की गई और सेंटर का नाम बदलकर नेल्सन मंडेला स्क्वायर रख दिया गया|

27 वर्ष जेल में काटे

मंडेला ने लोगों के लिए अपने जीवन के 27 वर्ष जेल में काटे| वे 1990 में जेल से रिहाई के बाद मंडेला दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति बने और वर्ष 1994 से 1999 तक उन्होंने सत्ता संभाली|

‘भारत रत्न’ पाने वाले पहले विदेशी

नेल्सन मंडेला ने अपने कार्यों और नीतियों से दुनिया को अपनी ओर आकर्षित किया, इसलिए उन्हें भारत सरकार ने 1990 में उन्हें भारत का सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘भारत रत्न’ से सम्मानित किया| वर्ष 1993 में उन्हें शांति के लिए नोबेल शांति पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया| 3 दिसंबर, 2013 को 95 वर्ष की उम्र में गंभीर बीमारी की वजह से नेल्सन मंडेला का परलोक गमन हो गया| विश्व इतिहास के अनूठे महानायक को आज उनकी जयंती के मौके पर शत-शत नमन…|

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