कर्ज में फंसे कई देश

1

यह किसी से छिपा नहीं है कि चीन दूसरे देशों को कर्ज के जाल में फंसाकर अपने हितों की पूर्ति करता है। चीन ने फिर अपने जाल में दक्षिण एशियन देशों जैसे नेपाल,पाकिस्तान और म्यांमार को फंसा लिया है। चीन को हर वर्ष व्यापार में नुकसान हो रहा है, इसके बावजूद चीन अधिक मात्रा में ऋण दे रहा है।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, अकेले नेपाल में, चीन के साथ आयात और निर्यात मूल्यों के बीच अंतर 21.4 प्रतिशत तक बढ़ गया है। इस वित्त वर्ष के पहले 10 महीने में दोनों देशों के बीच 124.5 बिलियन रुपए का व्यापार हुआ। नेपाल राष्ट्र बैंक ने खुलासा किया है कि 2015-16 के दौरान दोनों देशों के बीच 91.18 बिलियन रुपए का व्यापार हुआ।

पाकिस्तान भी फंसा

इतना ही नहीं चीन ने पाकिस्तान को दिए 50 करोड़ डॉलर के लोन के भुगतान को भी एक साल के लिए टाल दिया है। चीन ने पाकिस्तान के साथ आर्थिक गलियारे के निर्माण के तहत 19 प्रोजेक्ट्स में करीब 18.5 अरब डॉलर की राशि निवेश की है। इस पर पाकिस्तान को सालाना 7 प्रतिशत की दर से ब्याज चुकाना है और यह कर्ज 25 से 40 साल में चुकता करना है।

म्यांमार में संकट

म्यांमार में चीन के कई इन्फ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स चल रहे हैं। 1990 के दशक से दोनों देश साथ मिलकर कई इन्फ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स पर कार्य कर रहे हैं, लेकिन अब म्यांमार के सामने कर्ज में डूबने का संकट पैदा हो गया है। दरअसल, चीन म्यांमार में बन रहे क्योक प्यू बंदरगाह में 70 से 85 फीसदी हिस्सेदारी मांग रहा है, जो पहले 50-50 फीसदी तय थी।

श्रीलंका हुआ बर्बाद

बता दे कि ट्रंप प्रशासन ने हाल ही में कहा था कि गरीब देश इतना बड़ा कर्ज नहीं चुका पाएंगे। श्रीलंका इसका उदाहरण है। कर्ज न चुका पाने के कारण श्रीलंका को हम्बनटोटा बंदरगाह चीन को 99 साल के लिए पट्टे पर देना पड़ा।

Share.