चाबहार बंदरगाह भारत को सौंपेगा ईरान

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ईरान के शहरी विकास मंत्री अब्बास अखोंदी ने कहा कि अंतरिम समझौते के तहत एक महीने के भीतर चाबहार बंदरगाह भारतीय कंपनी के हवाले कर दिया जाएगा। अखोंदी नीति आयोग द्वारा आयोजित मोबिलिटी शिखर सम्मेलन में भाग लेने भारत आए हुए है। उन्होंने कहा कि भारत ने भी चाबहार पोर्ट में निवेश किया है। उसे शुरू करने की सारी तैयारियां हो चुकी हैं।

अखोंदी ने कहा कि हम एक कदम आगे निकल आए हैं। जल्द भारत के साथ मिलकर बैंकिंग व्यवस्था भी शुरू करेंगे। भारत भी सहमति देने को तैयार है। उन्होंने कहा कि भारतीय पक्ष ने चाबहार बंदरगाह में निवेश किया है और हम बंदरगाह के उपयोग की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। उन्होंने कहा कि बंदरगाह एक महीने में सौंप दिया जाएगा।

चाबहार पोर्ट बलूचिस्तान प्रांत में है। भारत के पश्चिमी तट से यहां आसानी से पहुंचा जा सकता है। चाबहार पाकिस्तान में चीन द्वारा परिचालित ग्वादर बंदरगाह से करीब 100 किलोमीटर दूर है। भारत के लिए चाबहार इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे भारत के लिए मध्य एशिया से जुड़ने का सीधा रास्ता मिलेगा और इसमें पाकिस्तान का कोई दखल नहीं होगा।

खासतौर पर अफगानिस्तान और रूस से भारत का जुड़ाव बेहतर हो जाएगा। चाबहार से भारत, ईरान और अफगानिस्तान के बीच व्यापार को नई दिशा मिलेगी। चाबहार बंदरगाह के जरिये भारत बिना पाकिस्तान जाए अफगानिस्तान और फिर उससे आगे रूस और यूरोप से जुड़ सकेगा। इससे पहले भारत को अफगानिस्तान जाने के लिए पाकिस्तान होकर गुज़रना पड़ता था।

चाबहार का इतिहास

1017 में भारत भ्रमण करने वाले पर्सियन विद्वान अलबरूनी ने एक किताब तारीख-ए-हिन्द लिखी थी, जिसमें उन्होंने जिक्र किया था कि भारत एक कस्बे से शुरू होता है, जिसका नाम ‘तिस’ है, जिसे बाद में तिज़ किया गया। अलेक्जेंडर ने भी 326 ईसा पूर्व भारत जाते समय सैन्य बल के साथ इस तिज़ को पार किया था। अब यह तिज़ ही आधुनिक चाबहार है, जो 1970 में अस्तित्व में आया था। 1980 में ईरान-ईराक युद्ध के समय यह तेहरान के लिए भी महत्वपूर्ण बन गया इसलिए इसे आर्थिक बंदरगाह के रूप में विकसित किया गया।

चाबहार का उद्घाटन

चाबहार के शाहिद बहिश्ती बंदरगाह के प्रथम चरण का उद्धाटन ईरान के प्रधानमंत्री रूहानी ने किया था, जिसमें भारत के तत्कालीन शिपिंग राज्यमंत्री पोन राधाकृष्णन ने भारत का प्रतिनिधित्व किया था। भारत-ईरान और अफगानिस्तान की चाबहार पर त्रिपक्षीय वार्ता भी इस उद्धाटन समारोह के साथ अनौपचारिक रूप से सम्पन्न हुई, जिसमें तीनों देशों ने कनेक्टिविटी इन्फ्रास्ट्रक्चर, जिसमें पोर्ट, सड़क और रेल नेटवर्क तथा समग्र विकास पर बात की थी। 23 मई 2016 को भारत के पीएम नरेंद्र मोदी के ईरान दौरे पर भारत, ईरान और अफगानिस्तान के बीच त्रिपक्षीय समझौते पर हस्ताक्षर हुए थे।

समझौते में क्या हैं?

अनुबंध के अनुसार भारत और ईरान की इन्फ्रास्ट्रकचर कंपनियों के बीच जो व्यापारिक सौदा होगा, वो इस बंदरगाह के माध्यम से होगा। भारत के लिए अपने व्यापार में सहयोगी देशों के साथ जुड़ना भी सरल होगा इसलिए अफगानिस्तान के लिए समुद्री बंदरगाह का विकल्प गारलैंड रोड नेटवर्क भी विकसित हो सकेगा। इस अनुबंध के अनुसार चाबहार बंदरगाह के घाट को 10 वर्ष के लिए करार पर दिया जाएगा, जो कि आगे पारस्परिक सहमति से वापिस नया भी बनाया जा सकेगा। स्पेशल पर्पस वेहिकल के अंतर्गत इस पोर्ट का विकास किया जाएगा, जो कि 85.21 मिलियन डॉलर के विनियोग से घाट को कंटेनर टर्मिनल और मल्टी पर्पज टर्मिनल कार्गो टर्मिनल में बदलेगा। भारत की तरफ से यह कान्दिया पोर्ट ट्रस्ट और जवाहर नेहरू पोर्ट ट्रस्ट मुंबई द्वारा मिलाकर करवाया जाएगा।

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