विदेशी बंदरगाहों में भारत

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भारतीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पिछले दिनों इंडोनेशिया पहुंचे| भारत और इंडोनेशिया ने व्यापक रणनीतिक साझेदारी को और आगे ले जाने के लिए 15 समझौतों पर हस्ताक्षर किए हैं| प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और इंडोनेशिया के राष्ट्रपति जोको विडोडो के बीच विस्तार से हुई बातचीत के बाद इन समझौतों को अंजाम दिया गया| दोनों नेताओं ने मरीन, इकोनोमी और सामाजिक-सांस्कृतिक क्षेत्रों में सहयोग को लेकर चर्चा की|

इस दौरान इंडोनेशिया ने भारत को अपने सामरिक रूप से महत्वपूर्ण सबांग बंदरगाह के सैन्य और आर्थिक इस्तेमाल की इजाजत दे दी है| रणनीतिक तौर पर इसे प्रधानमंत्री  की इंडोनेशिया यात्रा की सबसे अहम सफलताओं में से एक माना जा रहा है| इसकी मदद से पड़ोस में भारतीय नौसेना की ताकत में और भी इजाफा हुआ है| अब 4 महत्वपूर्ण विदेशी बंदरगाहों तक भारत की पहुंच सुनिश्चित हो गई है|

सबांग, इंडोनेशिया मलक्का जलसंधि हिन्द महासागर और प्रशांत महासागर के बीच की सबसे अहम शिपिंग लेन और सबसे व्यस्त समुद्री मार्ग है| सबमरीन के लिए भी पर्याप्त सक्षम इस बंदरगाह तक भारत की पहुंच होने से इस इलाके में चीन के बढ़ते वर्चस्व को काउंटर किया जा सकेगा|

दुकम, ओमान :  भारत को इस साल ओमान के दक्षिणी तट स्थित दुकम बंदरगाह पर मिलिटरी पहुंच हासिल हुई है| हिन्द महासागर के उत्तर पश्चिमी एज पर स्थित दुकम बंदरगाह लाल सागर तक आसान पहुंच उपलब्ध करवाएगा|

चाबहार, ईरान : यह पाकिस्तान के ग्वादर बंदरगाह के करीब है, जहां चीन ने काफी निवेश कर रखा है| यह बंदरगाह नॉर्थ-साउथ ट्रांसपोर्ट कॉरिडोर में भी आता है, जो भारत को सेंट्रल एशिया और यूरोप से जोड़ता है|

असम्पशन आइलैंड, सेशेल्स :  कागज पर यह पूरी तरह से एक इन्फ्रास्ट्रक्चरल प्रोजेक्ट है| सेशेल्स में राजनीतिक विपक्ष की वजह से इस एग्रीमेंट को रिवाइज़ करना पड़ा, लेकिन मुख्य रूप से यह भारत के रणनीतिक हितों की दिशा में ही आगे बढ़ा एक कदम है|

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