पाकिस्तान का ‘गरीबी में आटा गीला’, कोर्ट ने लगाया ज़ुर्माना

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पाकिस्तान इन दिनों भारी नकदी के संकट से जूझ रहा है | हालत यह है कि यह देश कंगाली के कगार पर आ पहुंचा है | पाकिस्तान वर्ष 1980 से आईएमएफ के 14 वित्त पोषण कार्यक्रमों का लाभ ले चुका है | चीन की मदद के बाद प्राप्त हुए फण्ड का उपयोग पाकिस्तान ने सीपीईसी के तहत बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के वित्त पोषण के लिए किया | जब इमरान प्रधानमंत्री बने थे, उसी समय पाकिस्तान पर चीन का लगभग 5 अरब डॉलर का कर्ज था | अब पाकिस्तान पर ‘गरीबी में आटा गीला’ कहावत चरितार्थ हो रही है | दरअसल, भारी नकदी संकट का सामना कर रहे पाकिस्तान को एक और तगड़ा झटका (5.97 Billion US Dollar Penalty On Pakistan) लगा है|

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प्राप्त जानकारी के अनुसार, एक अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता अदालत ने पाकिस्तान पर पांच अरब 97 करोड़ अमेरिकी डॉलर का जुर्माना  (5.97 Billion US Dollar Penalty On Pakistan) लगाया है| इस जुर्माने में 4.08 अरब डॉलर हर्जाना है और 1.87 अरब डॉलर ब्याज शामिल है| पाकिस्तान पर यह जुर्माना रेको डिक प्रोजेक्ट के लिए लगाया गया है| एक खनन लीज़ को गैरकानूनी तरीके से खारिज करने पर कोर्ट ने पाक पर यह जुर्माना लगाया है|

चिली की माइनिंग कंपनी और कनाडा बैरिक गोल्ड कॉरपोरेशन की साझा कंपनी टेथयान कॉपर कंपनी ने अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता अदालत में दावा दायर किया था| वर्ल्ड बैंक के इंटरनेशनल सेंटर फॉर सेटलमेंट ऑफ इन्वेस्टमेंट डिस्प्यूट के समक्ष साल 2012 में दायर की गई याचिका पर फैसला अब आया है| पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत की सरकार ने कंपनी की लीजिंग रिक्वेस्ट को खारिज कर दिया था|

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पाकिस्तान के खिलाफ अपने 700 पन्ने के फैसले में ट्रिब्यूनल ने शुक्रवार को 4.08 बिलियन अमरिकी डॉलर का जुर्माना (5.97 Billion US Dollar Penalty On Pakistan) और ब्याज के तौर पर 1.87 बिलियन अमरिकी डॉलर का जुर्माना लगाया| कंपनी ने नुकसान में 11.43 बिलियन अमरिकी डॉलर का दावा किया था | पाकिस्तान सरकार और कंपनी के बीच सात साल तक मामला चलता रहा|

वाशिंगटन स्थित अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) के अनुसार, ICSID का निर्णय पाकिस्तान के लिए एक बड़ा झटका है, जो एक “महत्वपूर्ण मोड़” पर है, जहां इसे सुधारों के एक महत्वाकांक्षी और साहसिक बदलाव की आवश्यकता है| पाक प्रधानमंत्री इमरान खान ने रविवार को रेको डिक मामले में पाकिस्तान द्वारा किए गए बड़े नुकसान की जांच के लिए एक आयोग के गठन और जिम्मेदारी तय करने के आदेश जारी किए|

यह है रेको डिक?

रेको डिक, बालोची भाषा में जिसका अर्थ है रेतीले शिखर, ईरान और अफगानिस्तान की सीमा के करीब, बलूचिस्तान में चगई जिले का एक छोटा सा शहर है| रेको डिक खदान अपने विशाल सोने और तांबे के भंडार के लिए प्रसिद्ध है और माना जाता है कि इसके पास दुनिया का पांचवा सबसे बड़ा सोना जमा है| पाकिस्तान के अखबार डॉन की एक रिपोर्ट के अनुसार, टीसीसी ने अगस्त 2010 के दौरान रेको दीख में खदान के विकास के लिए एक व्यापक और विस्तृत बैंकेबिलिटी फिजिबिलिटी स्टडी को पूरा किया और फरवरी 2011 में खनन पट्टे का आवेदन प्रस्तुत किया|

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नवंबर 2011 में परियोजना बंद हो गई, जब बलूचिस्तान सरकार ने रेको डिक के संबंध में खनन पट्टे के लिए टीसीसी की स्थानीय परिचालन सहायक द्वारा आवेदन को सरसरी तौर पर खारिज कर दिया|

सुप्रीम कोर्ट के तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश इफ्तिखार मुहम्मद चौधरी ने जनवरी 2013 में रेको डिक समझौते को शून्य घोषित कर देश के कानूनों के विरोध में बताया था|

गौरतलब है कि इस वर्ष की शुरुआत में भी अमरीका ने पाकिस्तान को करारा झटका दिया था| अमरीका की ओर से कहा गया था कि जब तक पाकिस्तान आतंकियों को पनाह देता रहेगा, तब तक पाकिस्तान की सुरक्षा सहायता पर प्रतिबंध लगाया है|

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