भारत के उत्तरप्रदेश में रहने वाले इस सख्स के कारण ईरान- अमरीका में हुई कट्टर दुश्मनी

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इन दिनों ईरान और अमेरिका (Iran And America) के मध्य भारी तनातनी का माहौल (Ayatollah Khomeini) है अनुमान लगाया जा रहा है की कही यह तकरार तीसरे विश्व युद्ध को जन्म ना दे दें दरअसल ऐसे हालत बनने का मुख्य कारण  ईरानी जनरल कासिम सुलेमानी (Iranian General Qasim Sulemani) की हत्या है जो बीती 5 जनवरी को अमेरिका के द्वारा एक ड्रोन हमले में की गई थी। इसके बाद फिर दूसरे दिन अमेरिका ने एक एयर स्ट्राइक की जिसमे इराकी मिलिशिया के डिप्टी कमांडर अबु महदी अल-मुहंदिस (Iraqi Militia Deputy commander Abu Mahdi al-Muhandis) की मौत हो गई थी.

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Ayatollah Khomeini From UP Is Behind The Bitterness In Relation

आपको बता दें कि 62 वर्षीय जनरल सुलेमानी (Iranian General Qasim Sulemani) को ईरान में आयतुल्ला खामेनेई (Ayatollah Khomeini) के बाद सबसे ताकतवर माना जाता था। उनका कुद्स फोर्स ईरानी रेवोल्यूशनरी गार्ड्स (Quds Force Iranian Revolutionary Guards) की एक इकाई था जो सीधे-सीधे आयतुल्ला को रिपोर्ट करता है। वर्तमान में ईरान के धर्मगुरु अयातुल्लाह खामनेई को ईरान का सबसे ताकतवर नेता माना जाता है। लेकिन क्या आपको पता है की ईरान के सबसे ताकतवर नेता की जड़े भारत से जुडी हुई है। जी हां अयातुल्लाह खामनेई के दादा उत्तर प्रदेश के थे. यहीं से वो ईरान गए और वहीं बस गए. ईरान और अमेरिका के बीच कट्टर दुश्मनी के नायक वही थे. जब वो ईरान में क्रांति कर रहे थे तो उन्हें इसी वजह से उन्हें भारतीय मुल्ला और ब्रिटिश एजेंट भी कहा गया. जिसके कारण ईरान से अमेरिका की खटकी और फिर लगातार वही स्थिति बनी हुई है. अयातुल्लाह खामनेई (Ayatollah Khomeini) के दादा सैयद अहमद मसूवी (Ahmed Masuvi) हिंदी उत्तर प्रदेश के बाराबंकी के रहने वाले थे. 1830 के दशक में अवध के नवाब के साथ वह एक धार्मिक यात्रा पर इराक गए. वहां वह ईरान के खुमैन गांव में बस गए. इसलिए एक पीढ़ी बाद उनका सरनेम  खामनेई हो गया. वो बाराबंकी के किन्तूर गांव से ताल्लुक रखते थे. आमतौर पर ये शांत गांव है. लेकिन इस शांत गांव से गए एक आदमी के कारण आज ऐसी स्थिति निर्मित हो गई है जिसके कारण तीसरे विश्व युद्ध के समीकरण बन रहे है। 1978 में ईरान के सरकारी अखबार में खामनेई को ईरान सरकार ने “भारतीय मुल्ला” और “ब्रिटेन का एजेंट” लिखा. उन्हें आशिकाना “गजलों में खोया रहने वाला बुड्ढा” भी कहा गया. इस लेख के छपने के बाद ईरान की जनता भड़क गई.

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Ayatollah Khomeini From UP Is Behind The Bitterness In Relationईरानी धर्मगुरु अयातुल्लाह रुहोल्लाह खामनेई (Iranian religious leader Ayatollah Khomeini)  इस्लामिक नेता थे. वह शाह के मुखर विरोधी थे. लेकिन असली कहानी शुरू हुई 1963 में, जब मोहम्मद रजा शाह पहलवी ने श्वेत क्रांति का ऐलान किया. ये एक छह सूत्री कार्यक्रम था. ये सुधार पश्चिम की नीतियों पर आधारित थे. इन सुधारों का विरोध होने लगा. खामनेई इस विरोध की अगुआई कर रहे थे. 1964 में शाह ने खामनेई को देश निकाला दे दिया. खामनेई की मौलवियों पर अच्छी खासी पकड़ थी और शाह पहलवी पश्चिमी नेताओं के साथ कई बार पार्टियां करते थे. ऐसी एक पार्टी को खामनेई ने शैतानों की पार्टी कहा था. 1973 में अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में भारी कमी हुई. ईरान की अर्थव्यवस्था और शाह की श्वेत क्रांति के ख्वाब चरमरा गए. मौलवियों ने इस दौरान श्वेत क्रांति को इस्लाम पर चोट कहा. इस दौरान मौलवियों को खामनेई (Ayatollah Khomeini) निर्देश दे रहे थे.सितंबर 1978 में तेहरान के शाहयाद चौक पर लाखों लोग इकट्ठा होकर शाह के खिलाफ प्रदर्शन करने लगे. शाह ने आक्रोश को दबाने के लिए मार्शल लॉ लागू किया. जनवरी 1979 तक ईरान में गृहयुद्ध के हालात हो गए. प्रदर्शनकारी खामनेई का निर्वासन खत्म करने की मांग करने लगे. 16 जनवरी 1979 को शाह परिवार समेत ईरान छोड़ अमेरिका चले गए. शाह ने भागने से पहले विपक्षी नेता शापोर बख्तियार को प्रधानमंत्री बना दिया था. नए प्रधानमंत्री ने खामनेई (Ayatollah Khomeini) को वापस आने की इजाजत दे दी. 12 फरवरी 1979 को खामनेई फ्रांस से ईरान लौटे. लाखों की भीड़ ने उनका स्वागत किया.

Ayatollah Khomeini From UP Is Behind The Bitterness In Relationखामनेई (Ayatollah Khomeini) ने बख्तियार सरकार को मानने से इनकार कर दिया. उन्होंने ऐलान किया कि वह सरकार बनाएंगे. 16 फरवरी को उन्होंने मेहदी बाजारगान को नया प्रधानमंत्री घोषित किया. देश में दो प्रधानमंत्री हो गए थे. ईरान की वायुसेना ने खामनेई को अपना नेता मान लिया. 20 फरवरी को शाह समर्थक इंपीरियल गार्ड्स और वायुसेना के बीच युद्ध हो गया. शाह समर्थक सेना हार गई. अप्रैल 1979 में एक जनमत संग्रह करवाया गया. इसके बाद ईरान को इस्लामी गणतंत्र घोषित किया गया. एक सरकार चुनी गई और खामनेई (Ayatollah Khomeini)  को देश का सर्वोच्च नेता चुना गया. प्रधानमंत्री के पद की जगह राष्ट्रपति का पद आ गया. इस क्रांति के साथ अमेरिका का ईरान से प्रभाव एकदम खत्म हो गया. शाह के समय दोस्त रहे दोनों देश अब दुश्मन बन गए थे. ईरान और अमेरिका ने आपस में राजनयिक संबंध खत्म कर लिए. तेहरान में ईरानी छात्रों के एक समूह ने अमेरिकी दूतावास में 52 अमेरिकी नागरिकों को बंधक बना लिया. इन लोगों ने अमेरिकी राष्ट्रपति जिमी कार्टर से शाह को वापस ईरान भेजने की मांग की. लेकिन ऐसा नहीं हुआ. धीरे-धीरे ये दुश्मनी और पक्की होती चली गई. खामनेई की 1989 में 86 साल की उम्र में मृत्यु हो गई. आपको बता दें की अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप (America President Donald Trump) ने कहा कि उनके निशाने पर ईरान के 52 इलाके हैं। उन्होंने बताया कि इन 52 इलाकों का चयन इसलिए किया गया है क्योंकि 1979 में ईरान ने 52 अमरीकियों को एक साल तक बंदी बनाकर रखा था। ये 52 इलाके उन 52 अमरीकियों का प्रतिनिधित्व करते हैं।

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-Mradul tripathi

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