व्यभिचार पर जानें कहां क्या है नियम ?

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सुप्रीम कोर्ट के 5 न्यायाधीशों की बेंच ने गुरुवार को भारतीय दंड संहिता में व्यभिचार से संबंधित धारा 497 को हटा दिया है। सुप्रीम धारा 497 को असंवैधानिक ठहराते हुए उन्होंने कहा कि महिलाएं अपने पति की प्रॉपर्टी नहीं हैं। 150 साल पुरानी भारतीय दंड संहिता की धारा 497 कहती थी कि किसी भी पत्नी के साथ यदि उसके पति की सहमति के बिना यौन संबंध बनाए जाते हैं तो इसे व्यभिचार माना जाएगा।

इसमें सीआरपीसी की धारा 198 के तहत मुकदमा चलाया जाता था और इसमें अधिकतम पांच वर्ष की सज़ा का प्रावधान था। पति की शिकायत पर मुकदमे दर्ज होते थे। अधिकतर इस्लामिक देशों में व्यभिचार एक अपराध है और दुनियाभर के ज्यादातर देशों में व्यभिचार को लेकर बने कानून विवाहित महिलाओं के खिलाफ हैं।

हालांकि 150 साल पुराना व्यभिचार का कानून दुनिया में अपनी तरह का पहला नहीं है। अमरीका जैसे कई विकसित देशों में व्यभिचार को अब भी अपराध माना जाता है। आइए जानें व्यभिचार अब भी अपराध कहां है, कहां नहीं…

इन देशों में सज़ा

अमरीका के 20 राज्यों में व्यभिचार एक अपराध है।

सऊदी अरब में व्यभिचार पर मौत की सज़ा का प्रावधान है।

इन देशों में अपराध नहीं :

साउथ अफ्रीका ने 1914 में व्यभिचार को अपराध की श्रेणी से बाहर कर दिया।

जापान ने 1947 में व्यभिचार को लेकर बने कानून को हटा दिया।

फ्रांस ने 1975 में महिला अधिकारों को ध्यान में रखते हुए व्यभिचार पर फैसला लिया।

ऑस्ट्रिया ने 1997 में कानून को खत्म कर दिया।

ब्राजील ने 2005 और रोमानिया ने 2006 में व्यभिचार को लेकर बने कानून को खत्म कर दिया था।

मेक्सिको ने 2011 और साउथ कोरिया ने 2015 में व्यभिचार को खत्म कर दिया।

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