सुप्रीम कोर्ट: सबरीमाला मंदिर में महिलाओं के प्रवेश से हटा प्रतिबंध

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सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को केरल स्थित सबरीमाला मंदिर पर ऐतिहासिक फैसला सुनाया| अब मंदिर में सभी उम्र की महिलाओं को प्रवेश दिया जाएगा| सुप्रीम कोर्ट ने ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए कहा कि अब मंदिर में हर उम्र वर्ग की महिलाएं प्रवेश कर सकती हैं| चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा और जस्टिस खानविल्कर ने कहा कि अयप्पा के भक्तों में कोई भेदभाव नहीं| महिलाओं को पूजा से रोकना उनके अधिकारों का हनन है| सबकी गरिमा का ख्याल रखना भी ज़रूरी है| औरतों के खिलाफ धर्म का इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए| पहले महिलाओं को कमजोर माना जाता था, लेकिन महिलाएं कमजोर नहीं हैं| सीजेआई के साथ पीठ में जस्टिस आरएफ नरीमन, एएम खान खानविल्कर, डीवाई चंद्रचूड़ और इंदू मल्होत्रा शामिल हैं|

दरअसल, केरल के सबरीमाला मंदिर में पिछले 800 साल से 10 से 50 साल की उम्र की महिलाओं का प्रवेश वर्जित था, लेकिन अब यह प्रतिबंध हट गया है| ‘इंडियन यंग लॉयर्स एसोसिएशन’ ने कोर्ट में इस प्रथा को चुनौती दी थी| इस फैसले पर कोर्ट ने 3 अगस्त को ही अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था| याचिकाकर्ताओं का प्रतिनिधित्व कर रहीं वरिष्ठ अधिवक्ता इंदिरा जयसिंह ने कहा कि यह प्रतिबंध संविधान के आर्टिकल 14, 15 और 17 के खिलाफ है| उनका तर्क है कि सालों से चली आ रही यह परंपरा महिलाओं संग किया जाने वाला भेदभाव है|

मंदिर प्रबंधन के विरोध में फैसला

सबरीमाला मंदिर प्रबंधन नहीं चाहता है कि महिलाओं का मंदिर में प्रवेश हो| उनका मानना है कि यह भेदभाव नहीं है क्योंकि परंपरा में यह माना जाता है कि देवता (अयप्पा) पूर्ण रूप से ब्रह्मचारी हैं|

यह थी मान्यता

मंदिर में महिलाओं के प्रवेश को रोकने के पीछे एक मान्यता है| ऐसा कहा जाता है कि भगवान अयप्पा ब्रह्मचारी थे| ऐसे में युवा और किशोरी महिलाओं को मंदिर में जाने की इजाज़त नहीं है| सबरीमाला मंदिर में हर साल नवम्बर से जनवरी तक श्रद्धालु अयप्पा भगवान के दर्शन के लिए जाते हैं बाकी पूरे साल यह मंदिर आम भक्तों के लिए बंद रहता है| भगवान अयप्पा के भक्तों के लिए मकर संक्रांति का दिन बहुत खास होता है इसलिए उस दिन यहां सबसे ज़्यादा भक्त पहुंचते हैं|

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