पति के कामकाज में दखल नहीं दे पत्नी: हाईकोर्ट

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मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने एक मामले में निचली अदालत के निषेधाज्ञा आदेश को सही मानते हुए कहा कि पत्नी पति के कार्य में दखल नहीं दे सकती  है। निचली कोर्ट ने महिला को आदेश दिया कि वह अपने पति की दुकान पर नहीं जाए। बता दें कि महिला और उसके पति के बीच तलाक का मुकदमा निचली अदालत में चल रहा है।

महिला ने निचली कोर्ट के आदेश को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट में अपील दायर की थी। महिला के वकील ने तर्क दिए कि दुकान में उसका पैसा लगा है और वह दुकान में आना-जाना चाहती है। वहीं महिला के पति के वकील ने तर्क दिया कि सिविल प्रक्रिया संहिता के आदेश 39 नियम एक-दो में प्रावधान है कि कोई भी व्यक्ति यदि किसी के काम में व्यवधान उत्पन्न करता है तो वह न्यायालय में निषेधाज्ञा आदेश प्राप्त कर सकता है। हाईकोर्ट इंदौर में जस्टिस प्रकाश श्रीवास्तव की एकल पीठ ने इन तर्कों से सहमत होकर महिला की अपील ख़ारिज कर दी।

दरअसल, मामला महू निवासी अमित जायसवाल का है। अमित ने पत्नी के खिलाफ नवंबर 2017 में महू अदालत में तलाक लेने की याचिका दायर की। इसके साथ ही निषेधाज्ञा आवेदन लगाया, जिसमें कहा कि महू में उसकी दुकान है। पत्नी दुकान पर आई और झगड़ा करते हुए दुकान से बिल और रुपए आदि ले गई। पहले भी दुकान पर जबरदस्ती दो गीजर, सैनिटरी की दो शीट ले गई। यह कृत्य क्रूरता की श्रेणी में आता है।

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