क्यों नगर भ्रमण पर निकलते हैं महाकाल? जानिए

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मध्यप्रदेश के उज्जैन जिले में स्थित महाकाल नगरी की विशेषता दुनिया भर में फैली है| आज सावन का पहला सोमवार है और आज के ही दिन उज्जैन के राजाधिराज महाराज महाकाल अगर भ्रमण पर निकलते हैं| महाकाल मंदिर में भस्म आरती के बाद दूध, दही, घी, शहद, फूल इत्र आदि से भगवान् का अभिषेक किया गया|

महाकाल अपनी नगरी के भ्रमण पर हर साल निकलते हैं आयर भक्तों की समस्याओं के बारे में जानते हैं| इनकी शाही सवारी पूरी दुनिया में प्रसिद्ध है| कहा जाता है कि बिना इनकी इच्छा के उनकी नगरी में पत्ता तक नहीं हिलता है|

ऐसे शुरू हुई परंपरा

जानकारों का मानना है कि पहले सावन में महाकाल ही सवारी नहीं निकलती थी| एक बार उज्जयिनी के प्रकांड ज्योतिषाचार्य पद्मभूषण स्व. पं. सूर्यनारायण व्यास के निवास पर कुछ विद्वजन के साथ कलेक्टर की बैठक चल रही थी| इस बैठक में यह तय किया गया कि सावन के आरंभ में हर साल बाबा की सवारी निकाली जाए| और उस समय उस प्रथम सवारी का पूजन सम्मान करने वालों में तत्कालीन मुख्यमंत्री गोविंद नारायण सिंह, राजमाता सिेंधिया व शहर के गणमान्य नागरिक मौजूद रहे| सभी पैदल सवारी में शामिल हुए और इस तरह एक नई परंपरा की शुरुआत हुई| पहले सिंधिया परिवार महाकाल ही सवारी निकालते थे लेकिन तब समय निश्चित नहीं था|

सिंधिया परिवार की ओर से शुरू की गई इस परंपरा में पहले महाराज शामिल होते थे, उसके बाद राजमाता नियमित इस यात्रा में शामिल होती रहीं और आज भी उनका कोई ना कोई प्रतिनिधित्व इस यात्रा में शामिल रहते हैं| आज भी मंदिर में एक अखंड दीप उन्ही प्रतिनिधियों द्वारा प्रज्ज्वलित किया जाता है|

सावन सोमवार 2018: पहले सोमवार को महाकाल की सवारी

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