क्यों पीएम मोदी हमेशा पंडित दीनदयाल उपाध्याय को करते हैं याद

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पंडित दीनदयाल उपाध्याय के विचारों की वजह से वे आज भी सभी के दिलों में बसे हुए हैं| प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने भाषण में कई बार उनका जिक्र करते हैं| वे अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति की भी चिंता वैसे ही करते थे, जैसे पहले स्थान पर खड़े व्यक्ति की करते हैं| एक महान विचारक, लेखक और एक अच्छे प्रचारक के रूप में उन्होंने सभी के दिलों में जगह बनाई| राजनीति-सामाजिक क्षेत्र में ‘एकात्‍म मानवतावाद’ का दार्शनिक विचार पेश करने वाले आरएसएस विचारक और भारतीय जनसंघ के सह-संस्‍थापक दीनदयाल उपाध्‍याय का जन्म  25 सितंबर, 1916 को मथुरा में हुआ था|

पंडित दीनदयाल उपाध्‍याय ने इंटरमीडिएट की परीक्षा पिलानी में विशेष योग्यता के साथ उत्तीर्ण की, इसके बाद वे कानपुर चले गए| 1937 में जब वे सनातन धर्म कॉलेज से बीए कर रहे थे तभी अपने एक मित्र के जरिये राष्‍ट्रीय स्‍वयंसेवक संघ (आरएसएस) के संपर्क में आए और उनसे जुड़ गए| उन्होंने संघ की शिक्षा का प्रशिक्षण लिया| इसके बाद वे संघ के प्रचारक बन गए|

जब इकलौता चुनाव हारे थे

वर्ष 1963 में तीसरी लोकसभा के चुनाव होने के बाद कई जगह उपचुनाव की स्थिति बन गई| उस समय उत्तर प्रदेश की जौनपुर सीट  पर भी उपचुनाव कराया जा रहा था| वे कार्यकर्ताओं के दबाव और खासकर भाऊराव देवरस के आग्रह की वजह से इस सीट पर चुनाव लड़ने के लिए तैयार हो गए| उन्होंने अपने जीवन का पहला और अंतिम चुनाव लड़ा और उसमें भी हार गए| दरअसल, पंडित दीनदयाल उपाध्‍याय के मुकाबले में कांग्रेस ने राजदेव सिंह को चुनावी अखाड़े में उतारा था| राजदेव सिंह इंदिरा गांधी के करीबी और युवाओं से जुड़े हुए थे|

रहस्यमयी मौत

पंडित दीनदयाल उपाध्‍याय  की मौत रहस्यमयी ढंग से हुई थी| वे 10 फरवरी, 1968 को लखनऊ से सियालदह एक्‍सप्रेस में पटना जाने के लिए चले, लेकिन जब ट्रेन रात करीब सवा दो बजे मुगलसराय स्‍टेशन पर पहुंची तो उनको ट्रेन में नहीं पाया गया| उनका शव रेलवे स्‍टेशन के पास मिला था| पुलिसिया जांच में यह सामने आया कि एक चोर जब दीनदयाल उपाध्‍याय का सामान लेकर भागने लगा तो उन्होंने उसका सामना किया| इसके बाद चोर ने उन्हें चलती ट्रेन से धक्का दे दिया, जिससे वे गिर गए और उनकी मौत हो गई|

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