बीरभूम जिले में स्वामी विवेकानंद की मूर्ति तोड़ी

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पश्चिम बंगाल के बीरभूम जिले में दस फीट ऊंचे प्लेटफॉर्म पर लगी स्वामी विवेकानंद की मूर्ति तोड़ दी गई है। जनवरी 2015 में एक स्थानीय क्लब द्वारा स्थापित की गई इस मूर्ति को कुछ स्थानीय लोगों ने क्षतिग्रस्त पाया तो इसकी सूचना पुलिस को दी। कुछ दिनों पहले ही देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू की मूर्ति तोड़ने की घटना सामने आई थी। इसके बाद स्वामी विवेकानंद की मूर्ति टूटने से इलाके में तनाव का माहौल है।

यह घटना बीरभूम के मोहम्मद बाज़ार की है। इस इलाके में लगी स्वामी विवेकानंद की मूर्ति की नाक और अंगुलियां तोड़ दी गई हैं जबकि सिर पर बड़ा सा पत्थर रख दिया गया है। मूर्ति का अनावरण करने वाले एक सदस्य ने कहा कि जिसने भी यह किया है वह स्वामी विवेकानंद के बारे में नहीं जानता है। साथ ही उन्होंने कहा, “इलाके के लोगों को स्वामी विवेकानंद के बारे में जागरुक करने की ज़रूरत है ताकि इस प्रकार की घटनाएं दोबारा न हो।”

मूर्ति तोड़ने की घटनाएं देश में बढ़ गई हैं। कुछ समय पहले ही स्वतंत्रता दिवस के मौके पर कुल्टी में प्रथम प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू की मूर्ति को खंडित किया गया था। वर्धमान में भी जवाहरलाल नेहरू की एक और मूर्ति को नुकसान पहुंचाया गया था।

स्वामी विवेकानंद को समर्पित 12 जनवरी का दिन देशभर में युवा दिवस के रूप में मनाया जाता है। स्वामी विवेकानंद ने भारत के युवाओं की सोच बदली है। उनके दिए हुए भाषण आज भी लोगों के लिए आदर्श हैं। उन्होंने देश के युवाओं से कहा था, “उठो, जागो और तब तक रुको नहीं, जब तक मंजिल प्राप्त न हो जाए। यह जीवन अल्पकालीन है, संसार की विलासिता क्षणिक है, लेकिन जो दूसरों के लिए जीते हैं, वे वास्तव में जीते हैं” उनके इतना कहने के बाद लाखो युवाअपने देश की आज़ादी के संघर्ष में जुट गए थे।

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