वसीम रिजवी ने राम मंदिर के लिए संपत्ति देने से किया इनकार

0

अयोध्या में एक बार फिर राम मंदिर मुद्दा गरमा गया है। शिया वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष वसीम रिजवी ने वक्फ संपत्ति को राम मंदिर या दूसरे किसी भी प्रकार के धार्मिक स्थल के निर्माण के लिए देने से इनकार कर दिया है। इसी मुद्दे पर शिया समुदाय के सर्वोच्च धर्मगुरु इराक के आयतुल्लाह अल सैयद अली अल हुसैनी अल सिस्तानी ने फतवा भी जारी कर दिया है।

दरअसल, वसीम रिजवी ने वक्फ संपत्ति को राम मंदिर निर्माण के लिए दिए जाने के संबंध में सुप्रीम कोर्ट में प्रस्ताव दिया था। कुछ समय इस पर असमंजस बना रहा। बाद में कानपुर के शिया बुद्धिजीवी और मैनेजमेंट गुरु डॉ. मजहर अब्बास नकवी ने इराक स्थित आका सिस्तानी के ऑफिस में ई-मेल भेजकर फतवा मांगा था। वसीम रिजवी के वक्फ संपत्ति को अयोध्या में राम मंदिर के निर्माण के लिए दिए जाने संबंधी प्रस्ताव पर यह फतवा मांगने के बाद ही मजहर अब्बास नकवी ने आका सिस्तानी से फतवा मांगा था। ई-मेल के जरिये मांगे गए इस फतवे में आका की ओर से जवाब आया ‘लायजोज’|

अरबी शब्द ‘लायजोज’ का हिंदी मतलब होता है, “इसकी अनुमति नहीं है।“  इस बात की पुष्टि करते हुए सोमवार को  नकवी ने पत्रकारों को जानकारी दी कि आका सिस्तानी के जवाब से यह साफ़ हो गया है कि शिया मुसलमान की हैसियत से वसीम रिजवी वक्फ संपत्ति मंदिर निर्माण या किसी अन्य प्रयोग के लिए दान नहीं कर सकते। उन्हें अपनी एप्लीकेशन अब ‘नॉट प्रेस’ कर देनी चाहिए और सर्वोच्च न्यायालय के फैसले का इंतज़ार करते हुए बयानबाजी से बचना चाहिए। यदि वह ऐसा नहीं करेंगे तो उन्हें शिया मुसलमान नहीं माना जाएगा।

डॉ. नकवी ने रिजवी को हिदायत भी दी कि अब वे याचिका वापस लें या फिर धर्म परिवर्तन कर लें। आका सिस्तानी के इस फैसले के बाद वसीम रिज़वी से वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष पद से इस्तीफ़ा मांग रहे हैं। सुन्नी उलेमा काउंसिल के महामंत्री हाजी सलीस,  ख़ानक़ाह तूसी के नायाब सज्जादानशीं मोइनुद्दीन चिश्ती, वर्ल्ड वसीला फोरम के शौकत भारती, दरगाह मकनपुर शरीफ के सज्जादानशीं सैयद नूरुल अरफ़ात जाफ़री और इंटरनेशनल सूफी मिशन माजिद देवबंदी आका के इस फैसले से खासे ख़ुश नज़र आए।

Share.