स्वामी के ट्वीट से वोरा परेशान

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भारतीय जनता पार्टी के राज्यसभा सांसद सुब्रहमण्यम स्वामी नेशनल हेराल्ड केस मामले में पिछले कुछ दिनों से लगातार ट्वीट कर रहे हैं। उन्हें ऐसा करने से रोकने के लिए कांग्रेस के वरिष्ठ नेता मोतीलाल वोरा ने अदालत में स्वामी के खिलाफ एक याचिका दायर की थी, जिसे अदालत ने सोमवार को खारिज कर दिया।

मोतीलाल वोरा ने अपनी याचिका में आरोप लगाया था कि स्वामी अपने ट्वीट्स के माध्यम से अदालत की कार्यवाही में दखल देने का प्रयास कर रहे हैं। इस पर एडिशनल चीफ मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट समर विशाल ने कहा कि स्वामी के ट्वीट्स में ऐसा कुछ भी प्रदर्शित नहीं किया गया है, जिससे इस मामले की सुनवाई को किसी तरह का कोई नुकसान पहुंचे या फिर अदालत के लिए कोई पूर्वाग्रह पैदा हो।

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता वोरा द्वारा दायर की गई याचिका को खारिज करते हुए अदालत ने कहा, “कोई भी अदालत किसी व्यक्ति को किसी मामले की कार्यवाही की रिपोर्टिंग करने से तब तक नहीं रोक सकती, जब तक यह प्रदर्शित नहीं हो जाता कि रिपोर्टिंग साफतौर पर और दुभार्वनापूर्ण रूप से गलत है।“

आगे अदालत ने कहा, “हो सकता है कि किया गया ट्वीट आवेदक या अन्य आरोपी की नजर में अच्छा लगने वाले न हो, लेकिन वे कैसे न्याय प्रशासन में दखल देते हैं या आरोपियों के बचाव में पूर्वाग्रहपूर्ण हैं, अस्पष्ट है। यदि आवेदक समझता है कि कुछ ट्वीट मानहानिकारक हैं तो उनके पास कानून के तहत उपयुक्त उपचार है।“

इस याचिका के बाद भाजपा सांसद स्वामी ने इन आरोपों से इनकार करते हुए कहा कि उनके ट्वीट मानहानिकारक नहीं हैं। आगे स्वामी ने कहा कि उन्हें ट्वीट करने का पूरा हक है। दूसरी तरह सुब्रमण्यम स्वामी ने अपनी निजी आपराधिक शिकायत में गांधी परिवार और अन्य आरोपियों पर धोखाधड़ी और धन की हेराफेरी की साजिश रचने का आरोप लगाया है।

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