ज़िन्दा होती तो डॉक्टर बन जाती छात्रा, माता-पिता को मिलेंगे 37 लाख रुपए

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सड़क दुर्घटना में 16 जनवरी 2011 को जान गंवाने वाली एक छात्रा के परिजन को कोर्ट ने 37 लाख रुपए देने का फैसला सुनाया है| दरअसल, रोशिता कानूनगो छात्रा की मौत के बाद निचली अदालत में उसके माता-पिता ने क्षतिपूर्ति के लिए केस दायर किया| इसके बाद अदालत ने महज 4 लाख 7 हजार रुपए देने का आदेश दिया, लेकिन अब हाईकोर्ट ने इस फैसले को बदलकर क्षतिपूर्ति की राशि बढ़ा दी है|

जानकारी के अनुसार, हाईकोर्ट ने निचली अदालत के फैसले को बदलते हुए कहा कि यदि छात्रा ज़िंदा होती तो वह आज डॉक्टर बन गई होती या भविष्य में वेटरनरी डॉक्टर बनने वाली होती| ऐसे में उसकी कमाई 25 हजार रुपए से कम नहीं होती| कोर्ट ने कहा कि छात्रा के जाने से उसके माता-पिता को जो क्षति पहुंची हैं, उसे पूरा करना तो नामुमकिन है, लेकिन उन्हें कुछ राहत ज़रूर दी जा सकती है| अब कोर्ट की ओर से कहा गया है कि मृतका के परिजन को 4 लाख 7 हजार रुपए का 9 गुना दिया जाए|

हाईकोर्ट जस्टिस रोहित आर्य ने यह फैसला सुनाया| कोर्ट ने ट्रक मालिक, ड्राइवर और नेशनल इंश्योरेंस कंपनी को आदेश दिया कि पीड़ित परिजन को 4 लाख के बजाय 36 लाख 99 हजार रुपए वह भी ब्याज के साथ दें| गौरतलब है कि वेटरनरी कॉलेज महू में पढ़ने वाली छात्रा रोशिता कानूनगो 16 जनवरी 2011 को जब अपनी एक्टीवा से इंदौर आ रही थी, तभी उसे तेज गति से आ रहे ट्रक ने पीछे से टक्कर मार दी| इसके बाद छात्रा में मौके पर ही दम तोड़ दिया था|

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