जेल में बंद पति से बहन बन मिलने पहुंची पत्नी

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रक्षाबंधन यूं तो भाई-बहन का त्यौहार है। बहन अपने भाई की कलाई पर राखी बांधती है और भाई भी अपनी बहन की रक्षा करने का वचन देता है। रक्षाबंधन भाई-बहन के नि:स्वार्थ प्रेम को दर्शाता है, लेकिन ग्रेटर नोएडा स्थित एक जेल में कुछ अनोखा ही रक्षाबंधन मनाया गया।

दरअसल, रक्षाबंधन पर रविवार को लुक्सर स्थित गौतम बुद्ध नगर जिला जेल में कई पत्नियां खुद को बहन बताकर पतियों से मिलने पहुंच गईं। जिला जेल में रविवार को रक्षाबंधन पर बंदियों से उनकी बहनों की खुली मुलाकात का प्रबंध किया गया था। 51 अतिरिक्त पुलिसकर्मियों की निगरानी में जेल प्रशासन द्वारा खुले में मुलाकात करवाई गई। जाली के बजाय जेल के अंदर खुले पार्क में मिलने की व्यवस्था परिजन के लिए अच्छी खबर थी। बस फिर क्या था, अलग-अलग अपराधों में सज़ा काट रहे वर्षों से जेल में बंद पतियों ने अपनी पत्नियों को देखा तो खुद को काबू नहीं रख सके और उन्हें बाहों में भर लिया। पत्नी को बाहों में भरते ही सच्चाई सामने आ गई। मामले की पोल खुलते ही ऐसी महिलाओं को बाहर निकाल दिया गया।

रविवार देर शाम तक 2 हजार से अधिक महिलाएं जेल में बंद भाइयों को राखियां बांधने पहुंचीं। इसके साथ ही अपनों से मिलने के लिए रक्षाबंधन पर कई मुस्लिम महिलाएं भी भाइयों से मिलने के लिए राखी लेकर पहुंच गईं। जेल प्रशासन के अनुसार, लगभग 100 से अधिक मुस्लिम महिलाओं ने जेल में पहुंचकर अपने भाइयों को राखी बांधकर रक्षाबंधन का त्योहार मनाया।

कई पत्नियां भी बहन बनकर जेल में बंद पतियों से मिलने पहुंच गईं थीं। पति-पत्नी लंबे समय बाद खुले आसमान के नीचे मिलकर एक-दूसरे को बाहों में भरने से रोक नहीं पाए। उनकी इसी हरकत को देखते हुए वहां मौजूद पुलिसकर्मियों को शक हुआ और जब पड़ताल की तो सच्चाई सामने आ गई। कुछ साथी कैदियों ने भी पुलिस कर्मियों को सुचना दी कि जो महिला उनके साथी से मिलने आई है वो उसकी बहन नहीं है। इसके बाद पत्नियों की पहचान कर उन्हें बाहर निकाला गया।

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