एनएसजी पर अमरीका ने दिया भारत का साथ

0

भारत के लिए एक खुशी की खबर सामने आई है। अमरीका ने साबित कर दिया कि वह भारत का पक्का दोस्त है। अमरीका परमाणु आपूर्तिकर्ता समूह (एनएसजी) में भारत की सदस्यता की वकालत करेगा। अमरीका के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि चीन वीटो के कारण भारत एनएसजी की सदस्यता हासिल नहीं कर पाया। उन्होंने कहा कि अमरीका भारत की सदस्यता की वकालत करेगा क्योंकि भारत इसके सभी मानदंडों को पूरा करता है। बता दें कि भारत 48 सदस्यीय परमाणु आपूर्तिकर्ता समूह में स्थान पाना चाहता है, लेकिन चीन लगातार रोड़े अटकाता रहता है।

दक्षिण और मध्य एशिया के लिए उप विदेशमंत्री एलिस वेल्स ने कहा कि एनएसजी आम सहमति पर आधारित संगठन है। चीन के विरोध के कारण भारत इसका सदस्य नहीं बन पा रहा है। उन्होंने कहा कि चीन के वीटो के कारण हम भारत को सहयोग करने से पीछे नहीं हटेंगे। हम एसटीए के दर्जे के साथ आगे बढ़े हैं और जानते हैं कि भारत एनएसजी की सदस्यता के लिए सभी मानदंडों को पूरा करता है। उन्होंने कहा कि भारत को कूटनीतिक व्यापार प्राधिकरण का दर्जा देकर अमरीका ने निकटतम सहयोगियों की सूची में रख दिया है।

क्या है एनएसजी ?

परमाणु आपूर्तिकर्ता समूह (एनएसजी) की स्थापना मई 1974 में हुई थी। 48 देशों का एनएसजी आधुनिक परमाणु सामग्री तथा तकनीकों का व्यापार करता है, लेकिन ऐसी सामग्री की बिक्री पर रोक भी लगाता है, जिसकी मदद से परमाणु हथियार बनाए जा सकते हैं। यह समूह परमाणु अप्रसार संधि (एनपीटी) पर हस्ताक्षर करने वाले देशों के साथ परमाणु व्यापार की अनुमति देता है। एनएसजी का कोई स्थायी कार्यालय नहीं है। एनएसजी वार्षिक बैठक करता है। भारत ने अब तक एनपीटी पर हस्ताक्षर नहीं किए हैं।

क्या है एनपीटी ?

परमाणु अप्रसार संधि (एनपीटी) की घोषणा 1970 में हुई थी। अब तक 187 देशों ने इस पर हस्ताक्षर किए हैं। हस्ताक्षर करने वाले देश भविष्य में परमाणु हथियार विकसित नहीं कर सकते। बस वे शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए परमाणु ऊर्जा का इस्तेमाल कर सकते हैं।

एनएसजी के सदस्य देश

अर्जेंटीना, ऑस्ट्रेलिया, ऑस्ट्रिया, बेलारूस, बेल्जियम, ब्राजील, ब्रिटेन, बुल्गारिया, कनाडा, चीन, क्रोएशिया, साइप्रस, चेक गणराज्य, डेनमार्क, इस्टोनिया, फिनलैंड, फ्रांस, जर्मनी, यूनान, हंगरी, आयरलैंड, इटली, जापान, कजाकिस्तान, लातिवया, लिथुआनिया, लक्जमबर्ग, माल्टा, नीदरलैंड, न्यूजीलैंड, नॉर्वे, पोलैंड, पुर्तगाल, रोमानिया, रूस, स्लोवाकिया, स्लोवेनिया, दक्षिण अफ्रीका, दक्षिण कोरिया, स्पेन, स्वीडन, स्विट्ज़रलैंड, तुर्की, यूक्रेन और अमरीका।

भारत के लिए क्यों ज़रूरी

ऊर्जा की मांग पूरी करने के लिए भारत का एनएसजी में प्रवेश ज़रूरी है। एनएसजी की सदस्यता मिलने से भारत को परमाणु तकनीक मिलेगी। वहीं भारत को यूरेनियम बिना किसी विशेष समझौते के मिलेगा। परणाणु संयंत्रों से निकलने वाले कचरे का निस्तारण करने में सदस्य देशों से मदद मिलेगी। साथ ही परमाणु तकनीक और कच्चा माल ट्रांसफर करने में भी मदद मिलेगी।

Share.