मेनका गांधी: मंदिर है, कोई जिमखाना या क्लब तो है नहीं…

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आज सुप्रीम कोर्ट ने केरल के सबरीमाला मंदिर के संबंध में ऐतिहासिक फैसला सुनाया| शीर्ष अदालत ने मंदिर में महिलाओं के प्रवेश पर लगी रोक हटा दी| यह फैसला आते ही कई लोगों की प्रतिक्रियाएं सामने आने लगीं| इस फैसले से जहां महिलाओं में ख़ुशी की लहर है वहीं कई लोग नाखुश भी हो रहे हैं| ‘केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री’ मेनका गांधी ने भी फैसले पर ख़ुशी जाहिर की| उन्होंने कहा कि यह निर्णय बहुत पहले ही आ जाना चाहिए था|

मेनका गांधी ने कोर्ट के फैसले का स्वागत करते हुए कहा, “कोर्ट का फैसला बिल्कुल सही है, भगवान के घर में जाने के लिए किसी कॉन्सेप्ट की आवश्यकता नहीं है| यह बहुत पहले हो जाना चाहिए था| कोई भी मंदिर एक जाति, एक वर्ग, एक लिंग के लिए नहीं होता है और वैसे भी हिंदू धर्म में महिला देवी पूजी जाती है| मंदिर है कोई जिमखाना या  क्लब तो है नहीं कि साड़ी पहनकर नहीं आ सकते|”

मंदिर की विशेषता

भगवान अयप्पा के इस मंदिर में रामायण, महाभागवत और स्कंद पुराण जैसे धार्मिक ग्रंथों के उल्लेख मिलते हैं| कहा जाता है कि मक्का-मदीना के बाद यह दुनिया का दूसरा ऐसा तीर्थ है, जहां हर साल करोड़ों श्रद्धालु आते हैं| इस मंदिर का असली नाम सबरिमलय है| मलयालम भाषा में पर्वत को शबरीमाला कहा जाता है| यह मंदिर
करीब 18 पहाड़ियों के बीच स्थित है और इसी आधार पर इसका नाम सबरिमलय रखा गया|

कोर्ट का फैसला

कोर्ट ने आज कहा कि भगवान अयप्‍पा हिंदू थे, उनके भक्‍तों का अलग धर्म न बनाएं| भगवान से रिश्‍ते दैहिक नियमों से नहीं तय हो सकते| सभी भक्‍तों को मंदिर में जाने और पूजा करने का अधिकार है| जब पुरुष मंदिर में जा सकते हैं तो औरतें भी पूजा करने जा सकती हैं| महिलाओं को मंदिर में पूजा करने से रोकना महिलाओं की गरिमा का अपमान है|

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