दिल्ली तक फैला है आतंकी आका हाफिज़ का जाल

0

लश्कर-ए-तैयबा सरगना और मुंबई हमले के मास्टरमाइंड हाफिज सईद को लेकर एक बड़ा खुलासा सामने आया है। हाफिज सईद की पहुंच राजधानी दिल्ली तक है। दिल्ली में उसके लोग काम कर रहे हैं। हाफिज सईद के संगठन फलाह-ए-इंसानियत फाउंडेशन (एफआईएफ) की टेरर फंडिंग का खुलासा हुआ है, जिसका पर्दाफाश एनआईए ने किया है। एनआईए अधिकारियों ने दिल्ली के दरियागंज, निजामुद्दीन और कूचा घासीराम में कई जगहों पर छापामारी की।

एनआईए के अनुसार, भारत में आतंक फंडिंग के लिए सलाह-ए-इंसानियत के नेटवर्क के बारे में सुरक्षा एजेंसियों को इसकी जानकारी कुछ महीने पहले मिली थी। जांच में सामने आया कि नई दिल्ली के निजामुद्दीन इलाके का रहने वाला मोहम्मद सलमान दुबई निवासी पाकिस्तान के एक नागरिक के साथ संपर्क में था। मोहम्मद सलमान को सलाह-ए-इंसानियत के लिए दुबई और अन्य देशों में बैठे लोग पैसे भेजा करते हैं, जिसे बाद में लश्कर-ए-तैयबा के आतंकियों तक पहुंचाया जाता था। एनआईए ने मोहम्मद सलमान के साथ सलाह-ए-इंसानियत की तरफ से पैसे मंगवाने वाले ऑपरेटर दरियागंज के मोहम्मद सलीम उर्फ मामा और श्रीनगर के अब्दुल राशिद को भी गिरफ्तार किया है।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, मोहम्मद सलमान, मोहम्मद सलीम और कूचा घासीराम में हवाला ऑपरेटर राजाराम एंड कंपनी के ठिकानों पर मंगलवार को छापा मारा गया था। एनआईए को छापामारी में एक करोड़ रुपए, 43 हजार नेपाली रुपए, 14 मोबाइल फोन और पांच पेन ड्राइव बरामद हुए हैं।

क्या है लश्कर-ए-तैयबा ?

लश्कर-ए-तैयबा की शुरुआत अफगानिस्तान के कुन्नार प्रोविंस में वर्ष 1987 में हुई थी। लश्कर-ए-तैयबा का मतलब होता है अच्छाई की सेना। इस संगठन को शुरू वाले अब्दुल्ला आजम, जफर इकबाल और हाफिज सईद थे। अल कायदा के जिस आतंकी ओसामा बिन लादेन को पाकिस्तान ने पनाह दी, वहीं लादेन लश्कर के लिए फंडिंग किया करता था। लश्कर के अलावा हाफिज सईद ने जमात-उद-दावा की शुरुआत की। इस संगठन को हाफिज़ और पाकिस्तान दोनों ही चैरिटेबल ट्रस्ट बताते हैं। वर्ष 2002 से लश्कर ने चैरिटी के बहाने पैसे जुटाना शुरू कर दिया। लश्कर को पर्शियन गल्फ, यूनाइटेड किंगडम के साथ पाकिस्तान और कश्मीर के कुछ बिजनेसमैन से काफी पैसा मिलता है।

Share.