पगड़ी रस्म में दी ‘सीपीआर’ की ट्रेनिंग

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कैसे किसी की जान बचे…? यह बात यदि उस परिवार के जेहन में आए तो कुछ ख़ास हो जाती है, जिस परिवार ने 12 दिन पहले ही हृदयाघात के कारण अपनी मां को खोया है| इंदौर के बंसल परिवार ने अपनी मां गीता बंसल की ‘ पगड़ी रस्म ‘ अनूठे अंदाज़ में की ओर समाज में जीवन बचाने का सन्देश देते हुए  ‘सीपीआर’ की जानकारी दी| इस दौरान मौजूद चिकित्सकों ने बाकायदा डेमो भी दिया|

मरीज के पास होता है कुछ समय

पगड़ी रस्म के दौरान डॉ. सुबोध चतुर्वेदी ने बताया कि किसी भी व्यक्ति के पास हार्टअटैक या कार्डियक अरेस्ट आने के बाद कुछ समय होता है, जब हम  मरीज की जान बचाने में सहायक हो सकते हैं| इस समय सीपीआर विधि से हम कम से कम मरीज को पास के अस्पताल तक जीवित अवस्था में पहुंचा सकते हैं|

मां की पगड़ी रस्म के दिन यह अनूठी पहल करने वाली बेटी डॉ. ममता बंसल और संगीता अग्रवाल ने कहा कि सीपीआर आज की आवश्यकता है| इस तरह हम 100 जरूरतमंदों में से इस विधि से कम से कम 7 लोगों की जान बचा सकते हैं| मां को जिस समय अटैक आया, तब भाई ने सीपीआर किया था| कोशिश की थी, लेकिन मां की उम्र अधिक थी| मां नहीं बच पाई, लेकिन एक अच्छे काम की शुरुआत पगड़ी रस्म से की गई है |

लोगों ने दिया साधुवाद

बारहवें याने पगड़ी की रस्म के साथ ही एक और अनूठी रस्म की भी अदाएगी देख पगड़ी में हिस्सा लेने पहुंचे लोगों यह जीवन रक्षक पहल अच्छी लगी | सभी ने यहां समझा कि हार्ट अटैक या कार्डियक अरेस्ट के दौरान कैसे मरीज की जान बचाई जा सकती है| अब ये सभी इस परिवार का साधुवाद दे रहे हैं, पगड़ी जैसी रस्म में समाज को सकारात्मक सन्देश देने की पहल की गई है| दरअसल जिस परिवार में मां की पगड़ी रस्म निभाई गई, उस परिवार में 5 डॉक्टर्स हैं| इस परिवार की मंशा है, कि वो समाज को कुछ ऐसा दे, जिससे लोगों की जान बच सकें|

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