लाल झंडी की जगह इस डिवाइस से रुकेगी ट्रेन

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अंग्रेजों के ज़माने से ही पटरी टूटने, ट्रैक या रेलवे फाटक खराब होने की स्थिति में लाल झंडी का इस्तेमाल किया जा रहा है| ऐसी स्थिति में ट्रेनें रोकने के लिए जिस दिशा से ट्रेन आ रही होती है, उस दिशा की  ओर भागकर लाल झंडी दिखाई जाती थी, जिसके बाद ट्रेन रुकती थी| वहीं अब रेलवे ने लाल झंडी को अलविदा कह दिया है| अब आपातकाल की स्थिति में ट्रेन रोकने पर लाल झंडी का इस्तेमाल नहीं किया जाएगा| अब रेलकर्मियों को टूटी हुई पटरी व खराब ट्रैक के दिखते ही जीपीएस आधारित डिवाइस का बटन दबाना होगा, जिससे तत्काल ट्रेनें रुक जाएंगी|

इस डिवाइस का बटन दबाते ही तुरंत रेलवे कंट्रोल व वरिष्ठ अधिकारियों को खराब ट्रैक व टूटी रेल पटरी की लोकेशन पता चल जाएगी और वे तुरंत ही ट्रेनें रुकवा देंगे| रेलवे ने ऐसे डिवाइस उपलब्ध कराए हैं, जिसे रेलवे ट्रैक की मॉनीटरिंग के दौरान रेलकर्मी अपने साथ रखते हैं| रेल हादसों को रोकने के लिए रेलवे ने यह कदम उठाया है|

कई बार ट्रेन जिस दिशा से आने वाली होती थी, उस दिशा में दौड़ भी लगा देते थे क्योंकि तुरंत कंट्रोल व अधिकारियों को मैसेज कर ट्रेनें रुकवाना मुश्किल होता था| रात के समय में टॉर्च लेकर दौड़ना काफी मुश्किल होता था|

इस तरह करती है डिवाइस काम

यह डिवाइस छोटे से मोबाइल के आकार की है, जो जीपीएस के आधार पर रेलवे ट्रैक की लोकेशन बताती है| इनमें कुछ शार्टकट बटन होते हैं, जिन्हें दबाते ही सीधे रेलवे के कंट्रोल रूम व वरिष्ठ अधिकारियों के पास सन्देश पहुंचता है| ट्रेन रोकने की कोई भी स्थिति में बटन दबाते ही कंट्रोल को ट्रैक व रेलकर्मियों की लोकेशन पता चल जाती है| वे दोबारा कॉल कर संबंधित रेलकर्मियों से स्थिति पूछते हैं और तत्काल ट्रेनों का आवागमन रोक देते हैं|

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