Video: अब नंबर पोर्ट कराने के लिए नहीं करना होगा इंतजार

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लोगों को अब एक कंपनी से दूसरी कंपनी में अपना नंबर बदलने के लिए परेशानी से निजात मिलेगी। इसके लिए उन्हें हफ्तेभर का इंतज़ार नहीं करना पड़ेगा। अब दो दिन में ही आपका नंबर एक ऑपरेटर से दूसरे ऑपरेटर में तब्दील हो जाएगा और यदि कंपनियों ने ऐसा कुछ नहीं किया तो उन्हें 10 हज़ार तक जुर्माना देना पड़ेगा।

‘ट्राई’ यानी ‘भारतीय दूरसंचार विनियामक प्राधिकरण’ ने मोबाइल नंबर पोर्टेबिलिटी के नियम में बदलाव किया है। मोबाइल नंबर पोर्ट कराने के लिए अब आपको 7 दिन का लंबा इंतजार नहीं करना पड़ेगा। ट्राई के नए नियम के मुताबिक, एमएनपी कराने की अधिकतम समय सीमा अब 7 दिन से घटाकर 2 दिन कर दी गई है। ये एक सर्कल के लिए ही लागू होगी। अगर एक सर्कल से दूसरे टेलिकॉम सर्किल में नंबर पोर्ट कराना है तो इसके लिए अधिकतम 4 दिन का समय लगेगा। इसके साथ ही पोर्टिंग रिक्वेस्ट को जान-बूझकर रिजेक्ट करने पर अधिकतम 10,000 रुपये के जुर्माने का प्रावधान रखा गया है।

अभी लगते हैं 7 दिन

ट्राई के मुताबिक, ट्राई की इस नई गाइडलाइन्स में टेलिकॉम ऑपरेटर्स की खराब सर्विस से जूझ रहे यूजर्स को दो दिन के अंदर ही वर्तमान ऑपरेटर को बदला जा सकेगा। फिलहाल यूजर्स टेलिकॉम ऑपरेटर को 7 दिन में बदल सकते हैं। देशभर में वर्तमान एमएनपी के नियम के मुताबिक ज्यादा से ज्यादा 7 कार्य दिवस में ऑपरेटर को बदला जा सकता है। वहीं, जम्मू और कश्मीर एवं नार्थ-ईस्ट राज्यों के यूजर्स को 15 कार्य दिवस का समय मिलता है। मोबाइल नंबर पोर्ट कराने को और सुविधाजनक बनाने के लिए भारतीय दूरसंचार विनियामक प्राधिकरण (ट्राई) ने इसी साल अप्रैल में एमएनपी के लिए नया ड्राफ्ट तैयार किया था। इस ड्राफ्ट में एमएनपी के लिए नई गाइडलाइन्स बनाई गई थी।

24 घंटे में भेजना होगी डिटेल्स

ट्राई की नई गाइडलाइंस के मुताबिक, वर्तमान ऑपरेटर को यूजर की पोर्टिंग डिटेल्स 24 घंटे के अंदर भेजनी होगी। अगर, ऑपरेटर इस प्रक्रिया में बिलंब करता है तो उसे अधिकतम 5,000 रुपये का जुर्माना देना पड़ सकता है। वहीं, यूजर्स को भी 24 घंटे के अंदर अपनी पोर्टिंग रिक्वेस्ट को रिजेक्ट करना होगा। 24 घंटे के अंदर पोर्टिंग प्रकिया शुरू हो जाएगी, जिसके लिए यूजर के पास एक एसएमएस भेजा जाएगा। इस पोर्टिंग प्रक्रिया को यूजर्स 24 घंटे के अंदर रोक सकते हैं। अप्रैल 2016 से लेकर मार्च 2017 के बीच टेलिकॉम आपरेटर्स ने 11.16 फीसद पोर्टिंग रिक्वेस्ट को रिजेक्ट किया है। जिसमें ज्यादातर मामले  यूनिक पोर्टिंग कोड मिसमैच के हैं। 40 फीसद मामला यूपीसी के एक्सपायर होने का भी शामिल है।

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