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Video: दीपावली के दूसरे दिन निभाई हिंगोट युद्ध की परंपरा

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इंदौर के गौतमपुरा में दीपावली के दूसरे दिन परंपरागत हिंगोट युद्ध हुआ। इस युद्ध को देखने के लिए बड़ी संख्या में गौतमपुरा और आसपास के लोग शामिल हुए। इस बार आचार संहिता के कारण गौतमपुरा में हुए हिंगोट के आयोजन से नेताओं ने दूरी ही बनाए रखी, लेकिन इसके बावजूद इस परंपरागत आयोजन के उत्साह में किसी तरह की कोई कमी नहीं आई।

दो गुटों के बीच दिखा युद्ध का नज़ारा

गौतमपुरा में होने वाले हिंगोट युद्ध में हमेशा से ही दो गुटों के बीच युद्ध देखने को मिलता है। इस दौरान तुर्रा और कलंगी दलों के बीच जमकर हिंगोट चले। ये दोनों ही दल क्षेत्र  के अलग-अलग गांव के युवाओं के होते हैं, जिन्हें सुरक्षा के लिए ढाल दी जाती है। परंपरा के मुताबिक, हिंगोट युद्ध की शुरुआत होते ही दोनों ओर से हवा में हिंगोट छोड़े गए। आग से भरे ये गोले एक-दूसरे को जाकर लगे और इस दौरान दर्शकों ने सीटियां बजाकर युद्ध करने वाले दलों का उत्साह बढ़ाया। देखते ही देखते गौतमपुरा का आकाश आग के गोलों से भर गया। सभी दूर आकाश में उड़ते हिंगोट और उनकी आवाज़ का नज़ारा लोगों को इस युद्ध के रोमांच पर ले गया।

क्या होता है हिंगोट

हिंगोट युद्ध में हमले के लिए इस्तेमाल किया जाने वाला ‘हिंगोट’ एक खास फल होता है। हिंगोट का बाहरी आवरण नारियल की तरह कठोर होता है, परंतु भीतर गूदा रहता है। चीकू के आकार के हिंगोट को  लगभग एक माह पूर्व तोड़कर सुखाया जाता है। इसके बाद उसे खोखला करके उसके अंदर बारूद भरा जाता है। इसके बाद इसे जब आग लगाकर आकाश की ओर फेंका जाता है, तो यह तेजी से आवाज़ करता हुआ आगे बढ़ता है। कई सालों से यहां हिंगोट युद्ध का आयोजन किया जाता है। यह आयोजन इस क्षेत्र  की पुरातन परंपरा का एक अभिन्न हिस्सा है, जिसे लेकर लोगों में एक माह पहले से ही उत्साह नज़र आने लगता है।

प्रशासन ने की थी व्यवस्था

हिंगोट युद्ध में किसी तरह की जनहानि न हो, इसे लेकर प्रशासन ने भी चाक-चौबंद व्यवस्था की थी। हिंगोट युद्ध में आने वाले दर्शकों के सामने जाली लगाई गई थी, वहीं ऐहतियातन पुलिस ने भी लोगों को आग के गोलों से बचने के लिए आगाह किया। पूरे आयोजन के दौरान प्रशासन की टीम भी विशेष रूप से मौजूद रही।

नेता रहे नदारद

हिंगोट युद्ध क्षेत्र  का सबसे प्रतिष्ठित और ख्यात आयोजन है। इस आयोजन में हर वर्ष बड़ी तादाद में लोगों के साथ ही नेताओं का भी जमघट लगता है। इस दौरान राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों द्वारा भी प्रतिभागियों को इनाम वितरित किए जाते हैं, लेकिन इस बार कोई भी नेता इस आयोजन में शामिल नहीं हुआ। विधानसभा चुनाव की आचार संहिता के कारण नेताओं ने इस आयोजन से दूरी ही बनाए रखी।

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