आज है ‘अंतरराष्ट्रीय शांति दिवस’

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विश्व शांति दिवस अथवा ‘अंतरराष्ट्रीय शांति दिवस’ प्रत्येक वर्ष ’21 सितम्बर’ को मनाया जाता है। यह दिवस सभी देशों और लोगों के बीच स्वतंत्रता, शांति और खुशी का एक आदर्श माना जाता है। ‘विश्व शांति दिवस’ मुख्य रूप से पूरी पृथ्वी पर शांति और अहिंसा स्थापित करने के लिए मनाया जाता है। विश्व शांति सभी देशों और लोगों के बीच और उनके भीतर स्वतंत्रता, शांति और खुशी का एक आदर्श है।

विश्व शांति पूरी पृथ्वी में अहिंसा स्थापित करने का एक माध्यम है, जिसके तहत देश या तो स्वेच्छा से या शासन की एक प्रणाली के जरिये इच्छा से सहयोग करते हैं ताकि युद्ध को रोका जा सके। वर्ष 1982 से शुरू होकर 2001 तक सितम्बर महीने का तीसरा मंगलवार ‘अंतरराष्ट्रीय शांति दिवस’ या ‘विश्व शांति दिवस’ के लिए चुना जाता था, लेकिन वर्ष 2002 से इसके लिए 21 सितम्बर का दिन घोषित कर दिया गया। वर्ष 2012 के ‘विश्व शांति दिवस’ की थीम थी- “धारणीय भविष्य के लिए धारणीय शांति”। आज इस मौके पर श्री रविशंकर ने अपने कुछ अनुभव साझा किए|

उन्होंने कहा, “कुछ साल पहले मैं इराक में हमारे राहत और पुनर्वास कार्यों को देखने गया था। हमें  सुरक्षित क्षेत्र ( ग्रीन जोन) में रहने के लिए कहा गया था| हमारी सुरक्षा के लिए 12 वाहन और दो टैंकर उपलब्ध करवाए गए थे| मैंने उनसे कहा कि मैं ‘रेड जोन’ में जाना चाहता हूं,  मैं ‘ग्रीन जोन’ में क्या करूं? उन्होंने कहा कि ‘रेड जोन’ काफी जोखिम भरा है और कुछ दिन पहले वहां बम विस्फोट हुए हैं, लेकिन जब मैंने आग्रह किया तो वे चिंतित हुए| चूंकि मैं उनका अतिथि था इसलिए वे इनकार नहीं कर सके। वहां, मैं एक गांव गया, जहां केवल शिया थे, क्योंकि सभी सुन्नी वहां से दूर चले गए थे| उन्होंने मेरा स्वागत किया, मैं उनके साथ बैठा,  बातचीत की और उनसे कहा कि मैं उस शाम को एक अतिथि लाना चाहता हूं और वे सहमत हो गए।

मैं अपने साथ एक सुन्नी इमाम लाया, जो उस गांव से दूर चले गए लोगों में से एक था। जब वे एक-दूसरे से मिले और बातचीत की तो ग्रामीणों ने फैसला किया कि हम यहां से भगाए गए 8,000 परिवारों का स्वागत करेंगे। यह समझदार होने के साथ-साथ लोगों की संवेदनशीलता को समझने से ही संभव है। यह तभी हो सकता है, जब हम शांतिपूर्ण हों।”

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