पाक में सर्जिकल स्ट्राइक के दौरान कमांडो की यह चाल कारगर साबित  

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भारत के जांबाज सैनिकों ने साल 2016 में जो बहादुरी भरा कारनामा किया था, उससे हर भारतीय का सीना गर्व से चौड़ा हो गया था। इस सर्जिकल स्ट्राइक के बारे में लोगों ने बहुत तर्क लगाए थे। हर कोई जानना चाहता था कि आखिर कैसे की जाती है यह सर्जिकल स्ट्राइक ? कैसे दुश्मन के खेमे में जाकर ही उसे ढेर किया जाता है ? हम आप को बताते हैं सर्जिकल स्ट्राइक से जुड़ी कुछ रोचक जानकारी, जिसे खुद सेना के पूर्व लेफ्टिनेंट जनरल ने साझा किया है।

सर्जिकल स्ट्राइक से जुड़ी एक दिलचस्प बात पुणे में सामने आई, जब उसमें योगदान के लिए पूर्व नगरोटा कॉर्प्स कमांडर ले. जनरल राजेंद्र निंबोरकर को सम्मानित करने के लिए कार्यक्रम आयोजित किया गया। उन्होंने बताया कि कैसे पाकिस्तान की सीमा में 15 किलोमीटर अंदर जाने के बाद कुत्तों को शांत रखने के लिए तेंदुए के मलमूत्र का इस्तेमाल किया गया। वर्ष 2016 में उरी स्थित सेना के कैंप पर किए गए आतंकी हमले के बाद पाकिस्तान में जिस सर्जिकल स्ट्राइक को अंजाम दिया गया था। वर्ष 2016 में उरी स्थित सेना के कैंप पर किए गए आतंकी हमले के जवाब में पाकिस्तान में सर्जिकल स्ट्राइक को अंजाम दिया गया था और इसके लिए पाक में सर्जिकल स्ट्राइक में कमांडो साथ लेकर गए थे तेंदुए का मल और पेशाब।

निंबोरकर ने बताया कि “सेक्टर में रहते हुए हमने देखा कि तेंदुए अक्सर कुत्तों पर हमला करते हैं। खुद को हमले से बचाने के लिए कुत्ते रात को बस्ती में ही रहते हैं।रणनीति बनाते वक्त हमको पता था कि रास्ते के गांवों से निकलते वक्त कुत्ते भौंकना शुरू कर सकते हैं और हमला कर सकते हैं। इससे निपटने के लिए हमारी टुकड़ियां तेंदुए का मल-मूत्र लेकर गईं। उसे गांव के बाहर छिड़क दिया जाता था। यह काम कर गया क्योंकि कुत्ते उन्हें छोड़ देते थे।”

इस सर्जिकल स्ट्राइक पर डिस्कवरी चैनल ने एक डॉक्युमेंटरी भी तैयार की थी, जिसको टीवी चैनल पर दिखाया गया था।

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