विश्व की सबसे बड़ी इमारत बुर्ज ख़लीफ़ा से भी बड़ा है इसका आकार

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अंतरिक्ष में एक छोटे से कंकर से लेकर विशाल पहाड़ के आकार के कई पत्थर मौजूद हैं, जिन्हें उल्कापिंड कहते हैं। ये पत्थर लगातार ब्रह्मांड में विचरण करते रहते हैं। ये पत्थर कभी-कभी अपनी कक्षा से बाहर आ जाते हैं और अन्य ग्रहों पर जा गिरते हैं। जब कभी कोई पिंड छोटा हो या बड़ा हो घूमते- घूमते पृथ्वी के पास आ जाता है तो  पृथ्वी की आकर्षण शक्ति यानि गुरुत्वाकर्षण के कारण वह पृथ्वी की ओर खींचने लगता है।

हाल ही में अमरीकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा ने अपनी एक रिपोर्ट में कहा कि एक विशाल उल्कापिंड तेज़ी से पृथ्वी के तरफ बढ़ रहा है। अनुमान लगाया जा रहा है कि इसका आकार दुबई स्थित विश्व की सबसे बड़ी इमारत बुर्ज ख़लीफ़ा से भी बड़ा हो सकता है। वैज्ञानिकों ने जानकारी दी है कि 2002-एजे 129 नाम का यह उल्कापिंड तेज़ी से धरती से टकरा सकता है। नासा ने इस उल्कापिंड को लेकर भारी चेतावनी दी है। यदि यह उल्कापिंड धरती से टकराया तो प्रलय आ सकता है। यह उल्कापिंड लगभग 0.7 मील बड़ा है। और इस उल्कापिंड की गति 67,000 मील प्रति घंटा यानी लगभग 1,07,826 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार आंकी गई है।

बताया जा रहा है कि वायुमंडल के घर्षण के कारण ये उल्कापिंड अपने मार्ग से विचलित हो चुका है और अब ये सीधे तौर पर धरती से नहीं टकराएगा। 2002-एजे 129 उल्कापिंड की धरती से टक्कर किसी परमाणु हमले से कम नहीं होगी। यदि ऐसा होता है तो पृथ्वी का तापमान 8 डिग्री तक गिर सकता है। पूरी दुनिया में भयानक ठंड हो जाएगी। ऐसे पत्थर उल्का पिंड या धूमकेतु कहलाते हैं |

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