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विधायक का बेटा दो महीने पहले सिलेक्टर था, अब खेलेगा टीम में

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उम्मीद जताई जा रही थी कि 10 साल आपसी खींचतान और 8 साल कोर्ट से लड़ाई लड़ने के बाद बिहार क्रिकेट अच्छी वापसी करेगा, लेकिन वनवास ख़त्म कर लौटते ही बिहार क्रिकेट फिर विवादों में घिर गया है। नेशनल क्रिकेट में 18 साल बाद वापसी करने वाला बिहार आते ही विवादों में पड़ गया है और विवाद की वजह है पटना सेंट्रल के विधायक अरूण कुमार सिन्हा के बेटे आशीष सिन्हा।

आशीष ने 2010 में झारखंड की तरफ से राजस्थान के खिलाफ एक रणजी मैच खेला था, जिसमें 16 और 12 रन बनाए थे, लेकिन लेकिन पीटीआई के पास जो दस्तावेज हैं, उनके अनुसार आशीष को जून में अंडर-23 राज्य टीम ट्रायल्स के लिए चयनकर्ता नियुक्त किया गया था। इसके बाद जून में आशीष ने कटिहार, अररिया, भागलपुर, किशनगंज, पूर्णिया, बांका और जमुई जिलों के लिए अंडर-23 क्षेत्रीय टीम के लिए चयनकर्ता की भूमिका निभाई थी। खुद आशीष ने भी इस बात को स्वीकारा है और यह भी कहा है कि अब वे विजय हजारे ट्रॉफी में खेलने के लिए तैयार हैं।

आशीष ने कहा, “हां, मुझे चयनकर्ता बनाया गया था, लेकिन अब मैं इस पद से हट गया हूं। मैं थोड़े समय के लिये चयनकर्ता रहा और इसके लिये कोई आधिकारिक पत्र भी जारी नहीं किया गया था।  मैं बीसीए के कहने पर ही  सिलेक्टर बना था।” खबरें आ रही थीं कि आशीष को उनके विधायक पिता के कारण राज्य की सीनियर टीम में चुना गया है, लेकिन आशीष ने इस बात पर कहा कि मैं आपको बता दूं कि जब मैं झारखंड के लिए रणजी ट्रॉफी में खेला था, तब भी मेरे पिता विधायक थे, इसलिए यह कैसे मायने रखता है। मैं अब भी क्लब क्रिकेट में सक्रिय हूं। बिहार क्रिकेट की घरेलू क्रिकेट में वापसी हुई है और मैं सीनियर टीम के लिए खेलना चाहता हूं। हमें खिलाड़ियों से छीछालेदर करने के बजाय इस पर गर्व करना चाहिए कि बिहार फिर से रणजी ट्रॉफी में खेलेगा।”

वहीं बिहार क्रिकेट संघ के अध्यक्ष गोपाल बोहरा आशीष का बचाव करते नज़र आए। बोहरा ने इस मामले पर कहा, “यह अस्थायी चयन समिति थी और आशीष उसका हिस्सा था। वह अच्छा क्रिकेटर है। इसके अलावा जब हम 18 साल बाद वापसी कर रहे हैं तो हमें कप्तान प्रज्ञान ओझा के अलावा कुछ अनुभवी खिलाड़ियों की ज़रूरत है। आशीष अनुभवी खिलाड़ी है और रणजी ट्रॉफी खेल चुका है। वह सीनियर खिलाड़ी है इसलिए उसे चुना गया है। ”

18 साल बाद वापसी कर रहे बिहार क्रिकेट से उम्मीद है कि अब बिहार से भी कोई धोनी या विराट कोहली या हार्दिक पंड्या जैसा क्रिकेटर देश को मिलेगा।

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