रविवार रात रक्षा क्षेत्र के लिए रही ख़ास, सुरक्षा खेमे में एक मिसाइल और जुड़ी

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भारत ने रक्षा क्षेत्र में एक और बुलंदी हासिल की है। रविवार रात करीब  8:05 मिनट पर ‘इंटरसेप्टर’ मिसाइल का टेस्ट सफलतापूर्वक किया गया। इसी के साथ भारत ने रक्षा क्षेत्र में एक और बड़ी उप‍लब्धि हासिल की है। रविवार रात को उड़ीसा के मिसाइल परीक्षण केन्द्र से एक इंटरसेप्टर मिसाइल का सफलतापूर्वक परीक्षण किया गया।  इस टेस्ट के बाद भारत ने दो स्तरीय बैलेस्टिक मिसाइल डिफेंस सिस्टम को डेवलप करने में बड़ी सफलता हासिल की है। रक्षा सूत्रों ने भी इस सफल परीक्षण की पुष्टि की है।

सूत्रों के अनुसार,  इंटरसेप्टर मिसाइल को अब्दुल कलाम द्वीप से रात में आठ बजकर पांच मिनट पर प्रक्षेपित किया गया।  इस परीक्षण केन्द्र को पहले व्हीलर द्वीप के नाम से जाना जाता था। इस मिसाइल के सुरक्षा खेमे में जुड़ने के बाद भारतीय थलसेना को मदद मिलेगी।  इस मिसाइल की ताकत की बात करें तो रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) के वैज्ञानिक ने कहा, “यह पृथ्वी रक्षा यान (पीडीवी) मिशन पृथ्वी के वायुमंडल में 50 किमी से ऊपर की ऊंचाई पर लक्ष्य को निशाना बनाने में सक्षम है।”

भारत में ही बनने वाली इस इंटरसेप्टर मिसाइल के अलावा कई और मिसाइल भी पहले सफलतापूर्वक जांची जा चुकी है। इससे पहले डीआरडीओ ने जमीन से जमीन पर मार करने वाली मिसाइल ‘प्रहार’ को टेस्ट किया था। ‘प्रहार’ पूरी तरह से देश में बनी अत्याधुनिक मिसाइल है। भारतीय सेना में ‘प्रहार’ जैसी मिसाइल के शामिल होने से सेना की स्ट्राइकिंग कैपेसिटी में इजाफा होगा साथ ही यह युद्ध प्रणाली के लिए ज़रूरी अल्ट्रा-मॉर्डन टेक्नोलॉजी को भी बढ़ाने में सक्षम है। इंटरसेप्टर का नाम पृथ्वी डिफेंस व्हीकल (पीडीवी) मिशन दिया गया।

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