साउथ अफ्रीका का बनतु समुदाय आज भी रहता है भारत के इस हिस्से में

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साउथ अफ्रीका के लोग अपने रंग-रूप,अलग जीवनशैली और संस्कृति के बलबूते बाकी लोगों से थोड़े अलग नज़र आते हैं। भारत में कई अलग-अलग धर्म प्रजाति और तौर तरीके वाले लोग निवास करते हैं। इनके तौर-तरीके और परंपराएं देश की समृद्ध संस्कृति और विरासत को आगे बढ़ाते हैं। इन्हीं में से एक हैं सिद्दी आदिवासी। आज के इस हाईटेक ज़माने में हर कोई इंटरनेट और दूसरी डिजिटल सेवाओं का इस्तेमाल करता है, लेकिन आज भी भारत के एक हिस्से में कुछ ऐसे लोग बसते हैं, जो अभी भी अपनी पुरानी परम्पराओं पर ही जीते हैं। ये मूल तौर पर साउथ अफ्रीका के बनतु समुदाय से हैं, जिन्हें पुर्तगाली गुलाम बनाकर भारत ले आए थे।

गुजरात के मशहूर ‘गिर’ जंगल के बीच बसा है इनका गांव| इनके गांव को ‘जंबूर’ कहा जाता है। आदिवासी जनजाति ‘सिद्दी’ के पारंपरिक तौर-तरीके हमारे देश की समृद्धि और परंपरागत विरासत को आज भी आगे बढ़ा रहे हैं। भारत के साथ-साथ पाकिस्तान में भी इनकी मौजूदगी पाई जाती है। भारत के गुजरात में ये लोग सबसे अधिक संख्या में रहते हैं,इसलिए गुजरात के इस गांव को ‘गुजरात का अफ्रीका’ भी कहा जाता है।  सिद्दी आदिवासी मूल रूप से अफ्रीका के बनतु समुदाय से जुड़े हैं।

गुजरात के अलावा कर्नाटक, आंध्रप्रदेश और महाराष्ट्र में भी इनकी मौजूदगी है। इस समुदाय के इतिहास के बारे में कहा जाता है कि लगभग 750 साल पहले इन्हें पुर्तगाली गुलाम बनाकर भारत लाए थे। वहीं कुछ लोगों का मानना है कि जूनागढ़ के नवाब एक अफ्रीकन महिला से शादी करके जब भारत आ रहे थे, तब वह महिला अपने साथ लगभग 100 गुलामों को भी साथ लेकर आई थी।

भारत आने के बाद बनतु समुदाय के लोगों ने समय के अनुसार अपना धर्म परिवर्तित कर लिया। बड़ी तादाद में लोगों ने इस्लाम धर्म को अपना लिया है और कुछ ने ईसाई धर्म को अपना लिया है।

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