सुप्रीम कोर्ट : IAS के पोते को भी माना जाएगा पिछड़ा?

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प्रमोशन में आरक्षण को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने तीखी टिप्पणी की है| कोर्ट ने इस मामले में याचिकाकर्ता से कई सवाल किए हैं| कोर्ट का कहा कि आरक्षक किस आधार पर दिया जाना चाहिए| यदि कोई रिजर्व कैटेगरी से आता है और वह उच्च पद पर आसीन है तो क्या उसे आरक्षण की आवश्यकता है| जाति के आधार पर क्या आईएएस के बेटे-पोतों को आरक्षण देना सही माना जाएगा|

सुप्रीम कोर्ट ने सवाल किया, “यदि एक आदमी रिजर्व कैटेगरी से आता है और राज्य का सेक्रेटरी है तो क्या ऐसे में यह तार्किक होगा कि उसके परिजन को रिजर्वेशन के लिए बैकवर्ड माना जाए? यदि कोई राज्य का सेक्रेटरी है तो क्या उसके परिवार को आरक्षण की आवश्यकता है| ऐसे में उस व्यक्ति को परिवार वाले बैकवर्ड साबित कर देंगे|”

दरअसल, कोर्ट यह तय कर रही थी कि क्या क्रीमीलेयर के सिद्धांत को एससी-एसटी के लिए लागू किया जाना चाहिए| यह नियम अभी केवल ओबीसी के लिए ही लागू है| कोर्ट ने कहा कि क्या यह मान लेना चाहिए कि एक जाति 50 सालों से पिछड़ी है और उसमें एक वर्ग क्रीमीलेयर में आ चुका है तो ऐसी स्थितियों में क्या किया जाना चाहिए?

सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रवैये में कहा कि आरक्षण का सिद्धांत का नियम उनके लिए बनाया गया है, जो सामाजिक रूप से पिछड़े हैं या फिर जिनकी आर्थिक स्थिति कमजोर है| ऐसे में इस पहलू पर विचार करना बेहद ज़रूरी है| केंद्र सरकार की तरफ से अटॉर्नी जनरल के के.वेणुगोपाल ने सुप्रीम कोर्ट में कहा कि प्रमोशन में आरक्षण देना सही है या इस पर गलत टिप्पणी नहीं करना चाहता, लेकिन यह तबका 1000 से अधिक सालों से झेल रहा है|

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