SC : सबरीमाला मंदिर में महिलाओं के प्रवेश पर..

1

सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले ने फिर से यह साबित कर दिया कि समाज में महिलाओं और पुरुषों को समान अधिकार मिला है| केरल सरकार को फटकार लगाते हुए सुप्रीम कोर्ट ने 800 सालों से चली आ रही प्रथा को समाप्त कर दिया| दरअसल, केरल के सबसे प्रसिध्द सबरीमाला मंदिर में महिलाओं का प्रवेश निषेध था| सबरीमाला का मंदिर ईश्वर अयप्पा को समर्पित है| यहां के लोगों का कहना है कि ईश्वर अयप्पा ब्रह्मचारी थे इसलिए वहां महिलाएं नहीं जा सकती थीं| अब इस मामले पर कोर्ट ने राज्य सरकार को फटकार लगाई है|

सभी को मिले समानता

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि मंदिर पब्लिक प्लेस है, जो किसी प्राइवेट संस्था के अंतर्गत नहीं आता है| सार्वजनिक जगह पर यदि पुरुष जा सकते हैं तो महिलाओं को भी प्रवेश की इजाज़त मिलनी चाहिए| मंदिर खुलता है तो उसमें कोई भी जा सकता है, किसी भी आधार पर किसी के प्रवेश पर प्रतिबंध लगाते हैं तो यह संविधान की भावना के खिलाफ है|

केरल सरकार का बदलता रुख

इसके पहले केरल सरकार भी इस मुद्दे पर तीन बार अपने रुख में बदलाव कर चुकी है| 2015 में राज्य सरकार ने मंदिर में महिलाओं के प्रवेश पर लगी रोक का समर्थन किया था| 2017 में सरकार ने इस फैसले का विरोध किया था| इस साल सरकार ने कहा कि मंदिर में महिलाओं को प्रवेश मिलना चाहिए| इससे पहले मंदिर में 10 से 50 साल की महिलाओं को प्रवेश नहीं दिया जाता था, लेकिन अब सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद महिलाओं के लिए सबरीमाला मंदिर के दरवाजे हमेशा के लिए खुल गए हैं|

10 वर्ष से 50 वर्ष के लिए पाबंदी

गौरतलब है कि अयप्पा मंदिर में 10 वर्ष से 50 वर्ष तक के उम्र की महिलाओं के प्रवेश पर पाबंदी है| दरअसल, महिलाओं के उस समूह को मंदिर में प्रवेश से रोका जाता है, जिन्हें माहवारी होती है| मंदिर में पहले महिलाओं के उम्र का सर्टिफिकेट देखकर उन्हें प्रवेश दिया जाता था| ऐसा माना जाता है कि भगवान अयप्पा एक ‘नास्तिक ब्रह्मचारी’ थे और इस कारण रजस्वला महिलाओं का मंदिर में प्रवेश वर्जित है| इस मामले पर कोर्ट ने सख्ती दिखाते हुए राज्य सरकार से जवाब दिया कि यदि 10 वर्ष से कम उम्र की लड़कियां या 50 वर्ष से अधिक उम्र की महिलाओं को भी माहवारी आए तो फिर क्या? फिलहाल कोर्ट ने महिलाओं के प्रवेश पर प्रतिबंध को तुरंत हटाने का आदेश दिया है|

Share.