सुप्रीम कोर्ट का दागी नेताओं पर रोक लगाने से इनकार

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सुप्रीम कोर्ट ने दागी नेताओं को लेकर बड़ा फैसला सुनाया है। सुप्रीम कोर्ट ने साफ कहा है कि संसद तय करे कि किसे अयोग्य ठहराया जाए और किसे नहीं। कोर्ट ने कहा कि संसद को यह सुनिश्चित करना होगा कि कोई अपराधी राजनीति में नहीं आए। भ्रष्टाचार और अपराधी लोकतंत्र को काफी नुकसान पहुंचा रहे हैं। ऐसे में पार्टियां अपने उम्मीदवारों की आपराधिक रिकॉर्ड की जानकारी वेबसाइट पर दें।

मामले पर लगाई गई याचिका के बाद सुप्रीम कोर्ट इसकी सुनवाई कर रहा था। भाजपा नेता अश्विनी कुमार उपाध्याय ने यह याचिका दाखिल की थी। पीठ ने 28 अगस्त को अपना फैसला सुरक्षित रख दिया था। वहीं पीठ ने चुनाव आयोग से राजनीति पार्टियों को निर्देश देने को कहा था कि किसी भी आरोपी को पार्टी के चुनाव चिन्ह पर चुनाव न लड़ने दिया जाए।

बता दें कि प्रभावी कानून के मुताबिक, आपराधिक मामलों में 2 साल से ज्यादा की सज़ा होने पर चुनाव लड़ने पर रोक लगती है। जेल से आने के बाद अपराधी 6 वर्ष के लिए चुनाव लड़ने के लिए अयोग्य हो जाता है। एनडीपीएस और भ्रष्टाचार जैसे मामलों में आरोप तय होने के बाद ये नियम लागू हो जाते हैं।

पांच जजों की पीठ ने केंद्र सरकार से पूछा है कि क्या चुनाव आयोग को इतनी शक्ति जी जा सकती है कि वह आपराधिक पृष्ठभूमि वाले उम्मीदवार को चुनाव चिन्ह देने से मना कर दे। इधर, केंद्र की तरफ से अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने इस का विरोध किया था। उन्होंने कहा कि ये कार्य कोर्ट का नहीं, बल्कि चुने हुए प्रतिनिधियों का है। वेणुगोपाल ने कहा कि ऐसा करने पर विरोधी एक-दूसरे के खिलाफ आपराधिक केस करने लगेंगे। चुनाव के वक्त प्रत्याशियों के खिलाफ ज्यादा केस दर्ज होने लगेंगे।

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