RBI के पीछे न छुपे, खुद भी कुछ करें सरकार- SC

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र मोर्चे पर विफल रही केंद्र की मोदी सरकार अर्थव्यवस्था को लेकर बिल्कुल न के बराबर प्रयास कर रही है , अब इस पर देश के सर्वोच्च न्यायालय सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने बुधवार को लोन मोरटोरियम ( Loan Moratorium) के मुद्दे पर केंद्र सरकार (Modi Government) को लताड़ा है. अदालत ने कहा, ‘आरबीआई के पीछे ना छिपें, अपना स्टैंड बताएं.’ जस्टिस अशोक भूषण की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा, ‘आप अपना रुख स्पष्ट करें. आप कुछ भी नहीं कह सकते हैं. आपदा प्रबंधन अधिनियम के तहत कदम उठाना आपकी जिम्मेदारी है. आपके पास पर्याप्त अधिकार हैं. आप केवल आरबीआई पर निर्भर नहीं रह सकते.’

सरकार के खिलाफ अदालत ने सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता द्वारा मामले में हलफनामे के बाद अपने सख्त टिप्पणी जाहिर की.जिसमें कहा गया था बैंकिंग संस्थान भी परेशान हैं. जस्टिस आर सुभाष रेड्डी, एमआर शाह और जस्टिस अशोक भूषण की बेंच ने कहा, ‘यह केवल व्यावसायिक हितों का ध्यान रखने का समय नहीं है, बल्कि आपको लोगों की दुर्दशा पर भी विचार करना चाहिए.’

सुप्रीम कोर्ट ने कहा,

, ‘आपदा प्रबंधन अधिनियम के तहत आपको स्टैंड लेना चाहिए..यहां दो मुद्दे हैं. क्या कोई ब्याज लगाया जाना चाहिए और क्या ब्याज पर कोई ब्याज लगाया जाना चाहिए.?’बेंच ने जोर देकर कहा, सरकार अपना रुख स्पष्ट करने के लिए कोई जवाब दाखिल नहीं कर रही है, बल्कि केवल आरबीआई के जवाब का हवाला दे रही है. पीठ ने तब केंद्र को अपना हलफनामा दायर करने और मामले में स्पष्ट रुख अपनाने के लिए एक सप्ताह का समय दिया था.

यह है मामला
बता दें यह मामला उस याचिका से संबंधित है जिसमें आरबीआई अनिवार्य लोन मोरटोरियम के दौरान छूट की मांग की गई है. इस याचिका में कहा गया है कि लोन मोरटोरियम एक निरर्थक कोशिश हैं क्योंकि बैंक ब्याज पर ब्याज लगा रहे हैं और इससे आम आदमी को कोई लाभ नहीं मिल रहा है.

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क्या है मोरटोरियम ?
अवधि जिस दौरान आपको लिए गए कर्ज पर EMI का भुगतान नहीं करना पड़ता है. इस अवधि को ईएमआई हॉलीडे के रूप में भी जाना जाता है. हालांकि यह सिर्फ ईएमआई टालने का विकल्प है.

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