एससी-एसटी एक्ट पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को भेजा नोटिस

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एससी-एसटी संशोधन कानून के खिलाफ दायर याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया है। सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से 6 सप्ताह में जवाब मांगा है। न्यायाधीश एके सीकरी और न्यायाधीश अशोक भूषण की अध्यक्षता वाली पीठ ने केंद्र सरकार को नोटिस जारी कर पूछा है कि कानून के अमल पर क्यों न रोक लगाई जाए। सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता ने कानून के अमल पर रोक लगाने की मांग की है, जिस पर पीठ ने कहा कि बिना सरकार का पक्ष सुने कानून के अमल पर रोक नहीं लगाई जा सकती।

दरअसल, दो वकील प्रिया शर्मा, पृथ्वीराज चौहान और एक एनजीओ ने जनहित याचिका दायर कर सरकार के संशोधन कानून को चुनौती दी है। याचिका में कहा गया है कि सरकार का नया कानून असंवैधानिक है। सरकार ने सेक्शन 18ए के तहत सुप्रीम कोर्ट के फैसले को विफल बनाया है, जो गलत है। सरकार के इस नए कानून से अब सीधे-सादे लोगों को फंसाया जाएगा। याचिका में कहा गया है कि सुप्रीम कोर्ट सरकार के नए कानून को असंवैधानिक करार दे, जब तक यह याचिका लंबित रहे। साथ ही कोर्ट नए कानून के अमल पर रोक लगाए।

सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद काफी विरोध हुआ था, जिसके बाद सरकार ने कानून को पूर्ववत रूप में लाने के लिए एससी-एसटी संशोधन बिल संसद में पेश किया था। दोनों सदनों से बिल पास होने के बाद इसे राष्ट्रपति के पास मंजूरी के लिए भेजा गया था। राष्ट्रपति की मंजूरी मिलने के बाद संशोधन कानून प्रभावी हो गया। इस संशोधन कानून के तहत एससी-एसटी अत्याचार निरोधक कानून में धारा 18ए जोड़ी गई। इस कानून का उल्लंघन करने वाले के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने से पहले प्रारंभिक जांच की ज़रूरत नहीं है। न ही जांच अधिकारी को गिरफ्तारी करने से पहले किसी से इजाज़त लेने की ज़रूरत है।

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